युवा और ग्रामीण उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए समर्पित है सरकार: धामी

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देहरादून के आईटी पार्क स्थित 13 गांव में खुलेगा राज्य स्तरीय विपणन केंद्र, लखपति दीदियों और महिला उद्यमियों का हुआ सम्मान

देहरादून 21 अगस्त। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के तहत ‘मुख्यमंत्री उद्यमशाला चौपाल-2026’ का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश की महिला, युवा और ग्रामीण उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने देहरादून के आईटी पार्क स्थित 13 गांव में प्रदेशभर के स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की बिक्री के लिए राज्य स्तरीय विपणन केंद्र खोलने की घोषणा भी की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के माध्यम से अब तक प्रदेश में 13 हजार से अधिक उद्यमियों को सहयोग दिया जा चुका है। वहीं, 8 हजार से अधिक महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों को उद्यमिता एवं आजीविका के अवसरों से जोड़ा गया है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के गांव अब विकास में सहभागी बनने के साथ आत्मनिर्भर प्रदेश के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। युवाओं और मातृशक्ति में हुनर और कुछ कर गुजरने की क्षमता है, जबकि स्थानीय उत्पादों में देश-दुनिया के बाजार तक पहुंचने की पूरी क्षमता है। जरूरत केवल हुनर को सही दिशा और बाजार उपलब्ध कराने की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्यमशाला योजना के तहत ग्रामीण उद्यमियों को व्यवसाय शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण, आर्थिक सहयोग, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार से जोड़ने में सहायता दी जा रही है। सरकार का उद्देश्य है कि उत्तराखंड का युवा रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बने।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत प्रदेश में 5 लाख से अधिक ग्रामीण महिलाओं को 70 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा गया है। वहीं, 3 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बनने में सफल हुई हैं। महिलाएं पहाड़ी मसालों, मंडुवा, झंगोरा, दाल, शहद, अचार, जैम, हस्तशिल्प और ऊनी उत्पादों समेत स्थानीय उत्पादों को व्यवसाय का रूप दे रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण उत्पादों को बड़े शहरों और राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ अंब्रेला ब्रांड तैयार किया गया है। ग्रामीण हाट, विपणन केंद्र, कलेक्शन सेंटर और एग्री सर्विस सेंटर जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि किसानों और उद्यमियों को बेहतर बाजार और उत्पादों का उचित मूल्य मिल सके।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने का एक प्रमुख उद्देश्य पलायन को रोकना भी है। सरकार चाहती है कि युवाओं को रोजगार के लिए गांव छोड़ने के लिए मजबूर न होना पड़े। ‘ग्रामोत्थान परियोजना’ के माध्यम से भी गांवों के अति-निर्धन परिवारों को आजीविका से जोड़कर रोजगार के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी 13 जिलों में मुख्यमंत्री उद्यमशाला चौपाल आयोजित की जा रही हैं। इनका उद्देश्य सरकारी योजनाओं की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना और पात्र लोगों को उनका लाभ दिलाना है। योजना के प्रचार के लिए प्रचार वैन भी गांव-गांव भेजी जा रही हैं।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने लखपति दीदियों और महिला उद्यमियों को सम्मानित किया। इस दौरान उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की पुस्तक और वार्षिक रिपोर्ट का विमोचन किया गया। साथ ही एकीकृत कृषि क्लस्टर आधारभूत प्रशिक्षण एवं मॉड्यूल, शिशु एवं लघु बाल आहार मॉड्यूल तथा महिलाओं एवं बच्चों में एनीमिया की रोकथाम एवं प्रबंधन मॉड्यूल का लोकार्पण भी किया गया।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री भरत चौधरी, गणेश जोशी, खजान दास, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक उमेश शर्मा काऊ और सविता कपूर, सचिव ग्राम्य विकास धीराज गर्ब्याल समेत संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

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