CAR-T सेल थेरेपी से 65-वर्षीय मरीज को दोबारा हुए आक्रामक ब्लड कैंसर से मिली नई जिंदगी

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देहरादून 20 अगस्त ।मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल साकेत के डॉक्टरों ने 65-वर्षीय मरीज का सफलतापूर्वक इलाज एडवांस्ड CAR-T सेल थेरेपी से किया, जो रिलैप्स्ड डिफ्यूज लार्ज बी-सेल लिम्फोमा (DLBCL) से पीड़ित थे, जो कि ब्लड कैंसर का एक आक्रामक प्रकार है। यह केस उन मरीजों के इलाज में सेलुलर थेरेपी की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है, जिनमें सामान्य कीमोथेरेपी के बावजूद बीमारी दोबारा हो जाती है। साथ ही, यह एडवांस्ड इलाज के लिए स्पेशलाइज्ड हीमैटो-ऑन्कोलॉजी और सेलुलर थेरेपी विशेषज्ञता की अहमियत को भी सामने लाता है।

देहरादून निवासी शरद चंद्र झाल्डियाल को DLBCL यानी आक्रामक ब्लड कैंसर, का पता चला था। वर्ष 2020 में उन्होंने मुंबई में R-CHOP कीमोथेरेपी के छह साइकल पूरे किए थे। हालांकि, इसके बाद उनकी बीमारी दोबारा लौट आई। लिम्फोमा के रिलैप्स होने के कारण उनका CAR-T सेल थेरेपी के लिए मूल्यांकन किया गया और आगे के एडवांस्ड इलाज के लिए उन्हें मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत में भर्ती किया गया। यहां उन्होंने जरूरी प्रिपरेटरी ट्रीटमेंट के बाद CAR-T सेल थेरेपी कराई।
CAR-T सेल थेरेपी से पहले मरीज को प्रिपरेटरी कीमोथेरेपी दी गई। CAR-T सेल थेरेपी एक एडवांस्ड इलाज है, जिसमें मरीज के अपने इम्यून सेल्स को इस तरह मॉडिफाई किया जाता है कि वे कैंसर सेल्स को पहचानकर उन पर हमला कर सकें। मरीज का इलाज हीमैटो-ऑन्कोलॉजी, बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन और सेलुलर थेरेपी के विशेषज्ञों की मल्टीडिसिप्लिनरी टीम ने किया।
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल साकेत के हीमैटोलॉजी एंड बोन मैरो ट्रांसप्लांट विभाग के वाइस चेयरमैन डॉ. रयाज अहमद ने कहा, रिलैप्स्ड DLBCL का इलाज चुनौतीपूर्ण हो सकता है, खासकर तब जब सामान्य कीमोथेरेपी के बाद बीमारी दोबारा लौट आए। ऐसे मामलों में सावधानी से चुने गए मरीजों के लिए CAR-T सेल थेरेपी एक महत्वपूर्ण इलाज विकल्प के रूप में सामने आई है। इसमें मरीज के अपने इम्यून सेल्स को दोबारा इंजीनियर किया जाता है, ताकि वे कैंसर सेल्स को बेहतर तरीके से पहचानकर उन्हें टारगेट कर सकें। इस थेरेपी के लिए स्पेशलाइज्ड इंफ्रास्ट्रक्चर, अनुभवी मेडिकल टीम और थेरेपी देने से पहले, उसके दौरान और बाद में मरीज की करीबी मॉनिटरिंग जरूरी होती है। इस केस में मरीज का सही चयन और मल्टीडिसिप्लिनरी मैनेजमेंट इलाज को सुरक्षित तरीके से पूरा करने में महत्वपूर्ण रहा।”
उन्होंने कहा कि सेलुलर थेरेपी रिलैप्स्ड या रिफ्रैक्टरी ब्लड कैंसर के इलाज में एक महत्वपूर्ण प्रगति है। इस थेरेपी की सफलता केवल इसकी उपलब्धता पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इसके लिए मरीज का सही मूल्यांकन, सेल थेरेपी प्रोटोकॉल, स्पेशलाइज्ड नर्सिंग, लैब मॉनिटरिंग, क्रिटिकल केयर सपोर्ट और संभावित कॉम्प्लीकेशन्स को मैनेज करने के लिए एक कोऑर्डिनेटेड प्रोग्राम की जरूरत होती है। इन सभी सुविधाओं को एक ही छत के नीचे विकसित करने से मरीजों को कॉम्प्लेक्स कैंसर ट्रीटमेंट के लिए एक व्यापक और समग्र इलाज व्यवस्था मिलती है। उन्होंने कहा कि मरीज अब पूरी तरह ठीक हैं और फिलहाल उनमें कैंसर के कोई लक्षण नहीं हैं। उनकी बीमारी पूरी तरह नियंत्रण में है। वह अच्छा महसूस कर रहे हैं और करीब एक महीने अस्पताल में रहने के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई।

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