जंग से भारत को हर साल ₹14.15 लाख करोड़ का नुकसान

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देहरादून, 3 अगस्त। नोमुरा की हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जंग (Corrosion) के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था को हर वर्ष लगभग ₹14.15 लाख करोड़ का नुकसान हो रहा है, जो देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 4.3 प्रतिशत है। रिपोर्ट के अनुसार, बुनियादी ढांचे और औद्योगिक परिसंपत्तियों के क्षरण से रखरखाव लागत बढ़ रही है, उत्पादकता प्रभावित हो रही है और परिसंपत्तियों का जीवनकाल घट रहा है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि जंग का सबसे अधिक असर राष्ट्रीय राजमार्गों, पुलों, रेलवे, बिजली अवसंरचना, दूरसंचार नेटवर्क, भवनों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर पड़ रहा है। इससे समय से पहले मरम्मत और प्रतिस्थापन की आवश्यकता बढ़ जाती है, जिससे अर्थव्यवस्था पर भारी वित्तीय बोझ पड़ता है।
विभिन्न क्षेत्रों में बिजली क्षेत्र जंग से सबसे अधिक प्रभावित है, जहां आर्थिक नुकसान क्षेत्रीय जीडीपी का 10.1 प्रतिशत आंका गया है। इसके बाद दूरसंचार (3.8 प्रतिशत), ऑटोमोबाइल (3.0 प्रतिशत) और रेलवे (2.8 प्रतिशत) का स्थान है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की लंबी समुद्री तटरेखा, अधिक आर्द्रता, औद्योगिक प्रदूषण और विविध जलवायु परिस्थितियां जंग की समस्या को और गंभीर बनाती हैं। इसी कारण भारत में जंग से होने वाला आर्थिक नुकसान कई विकसित देशों की तुलना में अधिक है।
अध्ययन में कहा गया है कि यदि वैश्विक मानकों के अनुरूप जंग-रोधी तकनीकों और प्रभावी प्रबंधन उपायों को अपनाया जाए, तो भारत की जीडीपी में 1.5 प्रतिशत तक की अतिरिक्त वृद्धि संभव है। इससे बुनियादी ढांचे की मजबूती बढ़ेगी, परिसंपत्तियों का जीवनकाल लंबा होगा और रखरखाव व प्रतिस्थापन पर होने वाला खर्च भी कम होगा।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि परियोजनाओं की योजना बनाने के शुरुआती चरण से ही जंग प्रबंधन को शामिल किया जाए तथा बेहतर इंजीनियरिंग मानकों, नियमित निरीक्षण, प्रभावी अनुपालन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त जंग-रोधी तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत तेजी से बुनियादी ढांचा विकसित कर रहा है। ऐसे में टिकाऊ और जंग-रोधी निर्माण तकनीकों को अपनाकर सार्वजनिक निवेश की दक्षता बढ़ाई जा सकती है तथा दीर्घकालिक आर्थिक नुकसान में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

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