
देहरादून। आगामी दिनों में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने सभी जिलों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। शनिवार को राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) में समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने बंद पड़ी सभी सड़कों, विशेषकर ग्रामीण मार्गों को जल्द से जल्द खोलने और क्षति की रिपोर्ट तत्काल शासन को भेजने को कहा।
सचिव ने लोक निर्माण विभाग, पीएमजीएसवाई और अन्य कार्यदायी संस्थाओं को निर्देश दिए कि जहां सड़कें बंद हैं, वहां आने वाली बाधाओं का तत्काल समाधान कर राहत एवं आवश्यक सेवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने जनपदों से नियमित रूप से आपदा संबंधी सूचनाओं का विश्लेषण कर त्वरित कार्रवाई करने को भी कहा।
मौसम विभाग के अनुसार 27 जुलाई को देहरादून और बागेश्वर, 28 जुलाई को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, पिथौरागढ़, नैनीताल और देहरादून तथा 29 जुलाई को उत्तरकाशी, देहरादून, टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली और बागेश्वर में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसे देखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी और पूर्व तैयारियां रखने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में पर्वतीय क्षेत्रों में आवश्यकता पड़ने पर रात्रिकालीन वाहन संचालन नियंत्रित या प्रतिबंधित करने, चारधाम यात्रा के दौरान प्रत्येक धाम में रात्रि विश्राम करने वाले यात्रियों का दैनिक ब्यौरा एसईओसी को उपलब्ध कराने तथा कैलाश मानसरोवर यात्रा और कांवड़ यात्रा के लिए सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, चिकित्सा सुविधाओं और त्वरित संचार व्यवस्था मजबूत रखने के निर्देश भी दिए गए।
सचिव ने निर्देश दिए कि आपदा के दौरान साहसिक और उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों तथा आपदा मित्रों को 26 जनवरी, 15 अगस्त और उत्तराखंड स्थापना दिवस (9 नवंबर) पर सम्मानित किया जाए।
उन्होंने सभी जिलों को आपदा प्रबंधन से जुड़े उपकरणों, मशीनरी और प्रशिक्षित मानव संसाधनों का विवरण आईडीआरएन पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश भी दिए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर संसाधनों की त्वरित उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
इसके अलावा विश्व बैंक सहायता प्राप्त यूप्रिपेयर परियोजना के तहत राज्य की तहसीलों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने का निर्णय लिया गया है। इसके अंतर्गत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष, डिजिटल स्क्रीन, लैपटॉप, कंप्यूटर, हाई-स्पीड इंटरनेट और वाई-फाई जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे आपदा के समय राज्य, जिला और तहसील स्तर पर बेहतर समन्वय और त्वरित निर्णय संभव हो सकेगा।







