देहरादून 12 अप्रैल।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मंगलवार को अपने 27वें उत्तराखंड दौरे पर पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के करीब साढ़े चार साल के कार्यकाल में यह उनका 17वां दौरा होगा। प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर पूरे प्रदेश में उत्साह का माहौल है और राज्य सरकार कार्यक्रम को भव्य बनाने की तैयारियों में जुटी है।
प्रधानमंत्री इस दौरे के दौरान दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेस-वे सहित टिहरी में 1000 मेगावाट क्षमता वाले देश के पहले वेरिएबल स्पीड पंप स्टोरेज संयंत्र का लोकार्पण करेंगे। यह परियोजनाएं राज्य में कनेक्टिविटी और ऊर्जा क्षेत्र में नई दिशा देंगी।
मई 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी पहली बार 11 सितंबर 2015 को ऋषिकेश पहुंचे थे, जहां उन्होंने अपने गुरु से भेंट की। इसके बाद से वह कई बार केदारनाथ धाम, बद्रीनाथ धाम और अन्य धार्मिक स्थलों का दौरा कर चुके हैं।
प्रधानमंत्री की यात्राओं से राज्य में तीर्थाटन और पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिला है। केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण और प्रचार के बाद यहां श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वहीं आदि कैलाश और मुखबा जैसे क्षेत्रों में भी पर्यटन तेजी से बढ़ा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का उत्तराखंड से “कर्म और मर्म” का गहरा संबंध है। उनके नेतृत्व में राज्य में दो लाख करोड़ रुपये से अधिक की विकास योजनाएं धरातल पर उतर चुकी हैं।
चारधाम ऑल वेदर रोड, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, केदारनाथ एवं हेमकुंड साहिब रोपवे और दिल्ली–देहरादून एलिवेटेड रोड जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को स्वीकृति मिली है। कनेक्टिविटी के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आया है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, रेल और हवाई सेवाओं का विस्तार हुआ है।
करीब 213 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेस-वे दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को जोड़ेगा। 11,963 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस प्रोजेक्ट में एशिया का 12 किलोमीटर लंबा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर, एलिफेंट अंडरपास और आधुनिक इंटरचेंज शामिल हैं। इसके पूरा होने के बाद दिल्ली से देहरादून की दूरी लगभग ढाई घंटे में तय की जा सकेगी।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी टिहरी में 1000 मेगावाट क्षमता वाले देश के पहले वेरिएबल स्पीड पंप स्टोरेज संयंत्र का भी लोकार्पण करेंगे। टीएचडीसी द्वारा विकसित यह परियोजना टिहरी हाइड्रो पावर कॉम्पलेक्स का हिस्सा है और अतिरिक्त विद्युत उत्पादन में सहायक होगी।
यह संयंत्र भारत की ऊर्जा सुरक्षा और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगा।प्रधानमंत्री के इस दौरे को लेकर जहां एक ओर प्रशासनिक तैयारियां अंतिम चरण में हैं, वहीं दूसरी ओर देवभूमि के लोगों में अपने लोकप्रिय नेता के स्वागत को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है।









