
देहरादून 23 मार्च।
उत्तराखंड में सरकार के “चार साल बेमिसाल” के दावों पर कांग्रेस ने सोमवार को प्रेस वार्ता कर राज्य की आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक स्थिति को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सरकार के दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है।
प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व नेता प्रतिपक्ष, पूर्व कैबिनेट मंत्री, चकराता से विधायक एवं चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष तथा अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सचिव और मंगलौर से विधायक ने सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला।
प्रीतम सिंह ने कहा कि यह “चार साल बेमिसाल” नहीं बल्कि “चार साल बेहाल” रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट का आकार बढ़ने के बावजूद राज्य की आर्थिक स्थिति कमजोर हुई है, महंगाई चरम पर है और राज्य की केंद्र पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि पंद्रहवें वित्त आयोग की अवधि में राज्य को लगभग 28 हजार करोड़ रुपये मिले, जबकि सोलहवें वित्त आयोग को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। साथ ही वस्तु एवं सेवा कर की प्रतिपूर्ति बंद होने से राज्य की आय के साधन प्रभावित हुए हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य में मातृशक्ति कुपोषण दर 56 प्रतिशत तक पहुंच गई है। सरकार 30 हजार रोजगार देने का दावा कर रही है, जबकि सेवा नियोजन कार्यालय में 10 लाख से अधिक बेरोजगार पंजीकृत हैं। प्रीतम सिंह ने कृषि क्षेत्र की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि कृषि की वृद्धि दर माइनस 4 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा पूरा नहीं हुआ, जबकि यूरिया के बोरे का वजन 50 किलो से घटाकर 40 किलो कर दिया गया और कीमत भी बढ़ा दी गई है। डीजल और बिजली की बढ़ती दरों पर भी उन्होंने सरकार को घेरा।
उन्होंने कहा कि पलायन आयोग निष्क्रिय हो चुका है, राज्य के 1726 गांव निर्जन हो गए हैं और लगभग 1700 विद्यालय बंद हो चुके हैं। स्मार्ट सिटी योजना के नाम पर केवल घोषणाएं हो रही हैं, जबकि देहरादून ही पूरी तरह स्मार्ट नहीं बन पाया है। नमामि गंगे परियोजना में हजारों करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद हालिया नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को “रेफर सेंटर” बताते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था कमजोर हो रही है, आपदा प्रबंधन विफल है और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए कोई ठोस नीति नहीं बनाई गई है।
वहीं काजी निजामुद्दीन ने कहा कि उत्तराखंड का बजट अब पारंपरिक आर्थिक दस्तावेज नहीं रह गया है, बल्कि एक “नैरेटिव आधारित प्रस्तुति” बन गया है, जबकि वास्तविक स्थिति वित्तीय लेखों में सामने आती है। उन्होंने कहा कि बजट अनुमान और वास्तविक व्यय के बीच लगातार बड़ा अंतर दिखाई देता है, जिससे बजट की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं। राज्य में राजस्व व्यय का प्रभुत्व है, जबकि पूंजीगत निवेश सीमित है।
उन्होंने कहा कि राज्य की अपनी राजस्व स्वायत्तता कमजोर होती जा रही है और केंद्र पर निर्भरता बढ़ रही है। साथ ही उधारी और ब्याज का बोझ लगातार बढ़ रहा है, जो भविष्य की आर्थिक स्थिरता के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में कमी है और बार-बार कम खर्च तथा बचत सामने आती है, जिससे यह साबित होता है कि सरकार घोषणाएं तो कर रही है लेकिन उन्हें धरातल पर लागू करने में विफल है।कांग्रेस नेताओं ने कहा कि “आंकड़े सच बोलते हैं, कथानक नहीं”, इसलिए सरकार को वित्तीय लेखों के आधार पर जनता को जवाब देना चाहिए। उन्होंने परिवहन विभाग का उदाहरण देते हुए कहा कि सैकड़ों बसें मानकों पर खरी नहीं उतरतीं, फिर भी सड़कों पर चल रही हैं।प्रेस वार्ता में कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता , देहरादून महानगर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष लालचंद शर्मा, महामंत्री नवीन जोशी, शोभाराम और प्रतिमा सिंह भी मौजूद रहे।कांग्रेस नेताओं ने कहा कि उत्तराखंड को प्रचार और दावों की नहीं, बल्कि जवाबदेह, पारदर्शी और विश्वसनीय वित्तीय शासन की आवश्यकता है।








