देवभूमि की धार्मिक-सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण पर जोर, ‘देवतत्व’ को संवारने में जुटी धामी सरकार

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देहरादून, 11 मार्च। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखंड के ‘देवतत्व’ को संरक्षित और सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी दिशा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए बजट का प्रावधान किया गया है।

उत्तराखंड गंगा, यमुना, चारधाम, आदि कैलाश और अनेक शक्तिपीठों की पवित्र भूमि होने के कारण विश्वभर के सनातन श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। राज्य सरकार उत्तराखंड को धार्मिक, आध्यात्मिक पर्यटन और तीर्थाटन के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलने की उम्मीद है।

सरकार पहले ही – पुनर्निर्माण परियोजना के साथ-साथ योजना के अंतर्गत 48 मंदिरों के आसपास आधारभूत सुविधाओं के विकास के कार्य शुरू कर चुकी है।

कुंभ और गंगा कॉरिडोर

राज्य सरकार ने बजट में के आयोजन के लिए एक हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके साथ ही से तक प्रस्तावित परियोजना के लिए पूंजीगत निवेश हेतु राज्यों को विशेष सहायता योजना के तहत लगभग दो हजार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

इसी क्रम में यात्रा के लिए 25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। तीर्थाटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार पहले ही शीतकालीन यात्रा की शुरुआत कर चुकी है।

रिवर फ्रंट और आध्यात्मिक विकास

धामी सरकार ने सहित अन्य रिवर फ्रंट परियोजनाओं के विकास के लिए भी बजट में प्रावधान किया है। साथ ही में घाट के विकास की योजना भी शामिल की गई है।

इसके अलावा स्प्रिचुअल इकोनॉमी जोन के लिए 10 करोड़ रुपये तथा संस्कृत पाठशालाओं को अनुदान देने के लिए 28 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

सरकार का मानना है कि धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन से न केवल प्रदेश की आस्था और परंपराओं को मजबूती मिलेगी, बल्कि धार्मिक पर्यटन के माध्यम से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आर्थिक अवसर भी बढ़ेंगे।

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