जन विश्वास विधेयक 2025 के तहत फार्मेसी एक्ट में अहम संशोधन

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जीवन और व्यापार को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम
देहरादून/नई दिल्ली 21 जनवरी।
भारत सरकार द्वारा जन विश्वास विधेयक 2025 के तहत विभिन्न अधिनियमों में जीवन एवं व्यापार को आसान और तर्कसंगत बनाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। इसी क्रम में फार्मेसी एक्ट, 1948 की धारा 26(8) में भी बदलाव किया गया है।
रजिस्ट्रार के एस  फर्स्वाण ने बताया कि पूर्व में प्रावधान के अनुसार, यदि कोई औषधि निर्माण इकाई या मेडिकल स्टोर फार्मेसी इंस्पेक्टर के कार्यों में बाधा डालता था, तो इसके लिए छह माह का कारावास तथा 1,000 रुपये अर्थदंड का प्रावधान था। अब इस धारा में संशोधन करते हुए कारावास के स्थान पर 1 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इस संशोधन को दंडात्मक व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक और व्यवसाय-अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इसके साथ ही एक्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि फार्मेसी इंस्पेक्टर को दवा निर्माण इकाइयों एवं दवा वितरण इकाइयों का निरीक्षण करने तथा यह जांचने का अधिकार होगा कि संबंधित कार्य में लगे व्यक्ति पंजीकृत (रजिस्टर्ड) फार्मेसिस्ट हैं या नहीं। दवाओं जैसे अति संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी प्रकार की लापरवाही को रोकने के लिए यह प्रावधान अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह संशोधन एक ओर जहां अनावश्यक आपराधिक प्रावधानों को कम करता है, वहीं दूसरी ओर दवा क्षेत्र में गुणवत्ता, सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करने में भी सहायक होगा।

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