देहरादून, 27 दिसम्बर। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि फाइटोकेमिस्ट्री और आयुर्वेद उत्तराखण्ड के आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य क्षेत्र के विकास के लिए मजबूत आधार हैं। वे देहरादून के इंद्र रोड स्थित फाइटोकेमिस्ट्री एवं आयुर्वेदा सोसाइटी द्वारा आयोजित फाइटोकेमिस्ट्री और आयुर्वेद की संभावनाओं पर आधारित सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
मंत्री जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यह कथन कि 21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखण्ड का दशक होगा, आज धरातल पर उतरता दिख रहा है। इसी क्रम में राज्य को 10वें विश्व आयुर्वेद कांग्रेस एवं आरोग्य एक्सपो के सफल आयोजन का अवसर मिला, जिसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार जताया।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन एवं वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति है, जो प्राकृतिक तरीकों से स्वस्थ और संतुलित जीवन को बढ़ावा देती है। आयुर्वेद रोग उपचार के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और समग्र कल्याण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वहीं फाइटोकेमिस्ट्री के माध्यम से औषधि विकास, पोषण, कृषि, पौध एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में व्यापक शोध कार्य हो रहे हैं।
मंत्री जोशी ने कहा कि उत्तराखण्ड की समृद्ध जैव विविधता और वन संपदा नई औषधियों की खोज के लिए अपार संभावनाएं प्रदान करती है। राज्य सरकार आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को जन-जन तक पहुंचाने और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने एरोमा एवं एरोमेटिक मेडिसिन के क्षेत्र में कार्य बढ़ाने पर भी जोर दिया और बताया कि कृषि, उद्यान एवं सुगंध पौध केंद्र इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। कार्यक्रम के अंत में मंत्री जोशी ने सभी को नववर्ष की अग्रिम शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर चेयरमैन एस. फारुख, डॉ. आई.पी. सक्सेना, डॉ. दुर्गेश पंत, वी.के. तिवारी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।





