
मुंबई, दिसंबर 2025।
रिश्तों की कसौटी, भावनाओं का सागर और परिवार का असल मतलब— इन सबको बड़े परदे पर जीवंत करती अनिल शर्मा निर्देशित फिल्म ‘वनवास’ अब दर्शकों के घरों तक पहुंचने जा रही है। ‘गदर 2’ और ‘अपने’ जैसी यादगार फिल्मों के बाद अनिल शर्मा एक बार फिर एक ऐसी संवेदनशील कहानी लेकर आए हैं, जो हर दिल को छू जाएगी। यह फिल्म बुधवार, 10 दिसंबर, रात 9 बजे पहली बार ज़ी बॉलीवुड पर प्रसारित होगी।
फिल्म एक ऐसे पिता की कहानी है, जिसकी यादें धुंधली होती जा रही हैं और जिसे सबसे ज़्यादा सहारे की जरूरत है— लेकिन उसी समय अपने ही लोग उसे तीर्थयात्रा पर अकेला छोड़ देते हैं। यह सिर्फ़ अकेलेपन का दर्द नहीं, बल्कि टूटते रिश्तों की टीस है, जिसे निर्देशक ने बेहद भावनात्मक रूप से दिखाया है। ‘वनवास’ परिवार के महत्व, प्रेम, उम्मीद और त्याग की कहानी है— एक ऐसी कहानी, जिसे पूरा परिवार साथ बैठकर देख सकता है।
फिल्म में नाना पाटेकर के अभिनय की गहराई हर दृश्य को जीवंत कर देती है। उत्कर्ष शर्मा और सिमरत कौर की जोड़ी ‘गदर 2’ के बाद एक बार फिर पर्दे पर नई ऊर्जा भरती दिखती है। दोनों कलाकार अपने किरदारों की भावनाओं को सहजता और सच्चाई से प्रस्तुत करते हैं। वहीं मिथुन का संगीत फिल्म की संवेदनाओं को और ऊंचा उठा देता है।
निर्देशक अनिल शर्मा कहते हैं कि ‘वनवास’ आज के समाज की सच्चाई दिखाती है— जहां कई बुजुर्ग अपने ही घरों में परायापन महसूस करते हैं। उन्होंने बताया कि यह फिल्म त्यक्त पिता और एक अनाथ बेटे की कहानी है, जो एक-दूसरे में परिवार ढूंढ लेते हैं और यही इसका सबसे बड़ा संदेश है: परिवार ही सबसे बड़ा सहारा है।
नाना पाटेकर ने भी ‘वनवास’ को समय की जरूरत बताया। उनके अनुसार, यह फिल्म उन अनकही दूरियों पर रोशनी डालती है, जो आधुनिक परिवारों में बढ़ रही हैं। “जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, यादें धुंधली हो सकती हैं, लेकिन परिवार का महत्व कभी नहीं भूलना चाहिए,” उन्होंने कहा।
उत्कर्ष शर्मा ने नाना पाटेकर के साथ काम को अपने लिए बेहद खास अनुभव बताया और कहा कि ‘वनवास’ आज के दौर में परिवार की अहमियत की सबसे खूबसूरत याद दिलाती है। सिमरत कौर के अनुसार, यह फिल्म हर पीढ़ी से संवाद करती है— बुजुर्गों के दर्द से लेकर युवाओं की जिम्मेदारियों तक।







