ऊपरी यमुना नदी बोर्ड की 9वीं रिव्यू कमेटी की बैठक में उठाया राज्य का पक्ष
देहरादून/नोएडा 27 नवंबर ।
उत्तराखंड के सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने गुरुवार को ऊपरी यमुना नदी बोर्ड की 9वीं रिव्यू कमेटी बैठक में राज्य को उसकी मांग के अनुसार यमुना जल आवंटित किए जाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में सिंचाई संसाधनों की कमी के कारण नकदी फसलों—फल, सब्ज़ी आदि की उत्पादकता प्रभावित हो रही है, जिससे पलायन भी बढ़ रहा है। ऐसे में उत्तराखंड को उपलब्धता के अनुपात में यमुना जल मिलना आवश्यक है।
नोएडा स्थित ऊपरी यमुना नदी बोर्ड भवन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में हुई बैठक में जलस्तर, प्रदूषण नियंत्रण और जल-बंटवारे जैसे प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रदेश के सिंचाई, पर्यटन, धर्मस्व, संस्कृति, पंचायतीराज, लोक निर्माण, ग्रामीण निर्माण एवं जलागम मंत्री सतपाल महाराज ने बताया कि 12 मई 1994 के समझौते के अनुसार यमुना बेसिन के पांच राज्यों—उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली—को जल आवंटन तय किया गया था। उस समय उत्तर प्रदेश को 4.032 बीसीएम जल आवंटित हुआ था।
वर्ष 2000 में उत्तराखंड राज्य गठन के बाद वह ऊपरी यमुना नदी बोर्ड का छठा सदस्य बना, लेकिन उत्तर प्रदेश से जल-बंटवारे पर समझौता न होने के कारण केंद्र के हस्तक्षेप में उत्तराखंड को उसकी मांग से लगभग 32 प्रतिशत कम जल मिला।
महाराज ने कहा कि 21 फरवरी 2024 को हुई 8वीं रिव्यू कमेटी बैठक में उत्तराखंड को 0.311 बीसीएम जल आवंटित किया गया था, जो कि राज्य की मांग से काफी कम है। यह सहमति इस शर्त के साथ दी गई थी कि वर्ष 2025 के बाद 1994 के समझौते की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने बोर्ड से आग्रह किया कि समीक्षा के दौरान उत्तराखंड को यमुना जल की उपलब्धता के अनुपात में न्यायपूर्ण आवंटन दिया जाए।
उन्होंने कहा कि लखवाड़ एवं किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजनाओं से बनने वाले जलाशयों का पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव सबसे पहले उत्तराखंड को झेलना होगा, इसलिए जल आवंटन में राज्य का संतुलित हिस्सा सुनिश्चित किया जाना चाहिए।दिल्ली में यमुना के बढ़ते प्रदूषण पर चिंता व्यक्त करते हुए महाराज ने सुझाव दिया कि हरियाणा से यमुना में अमोनिया और अन्य प्रदूषकों के निर्वहन को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि औद्योगिक इकाइयों को अमोनिया-विशिष्ट ट्रीटमेंट तकनीक अपनानी चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाए कि अपशिष्ट जल बिना उपचार के नदी में न छोड़ा जाएबैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह, दिल्ली के सिंचाई मंत्री प्रवेश वर्मा, हरियाणा की सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी और राजस्थान के सिंचाई मंत्री सुरेश सिंह रावत उपस्थिति थे ।








