
देहरादून, 16 अक्टूबर। जिला सड़क सुरक्षा समिति और जिला प्रशासन की ओर से आईटीडीए सभागार में पीएम राहत योजना एवं नेक राहवीर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें स्वास्थ्य, पुलिस, परिवहन, लोक निर्माण विभाग, राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण, निजी चिकित्सालयों और स्वयंसेवी संस्थाओं सहित विभिन्न विभागों के करीब 300 अधिकारियों, कर्मचारियों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
संगोष्ठी का शुभारंभ कैबिनेट मंत्री खजानदास ने किया। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए विभागीय समन्वय के साथ जनजागरूकता और जनभागीदारी जरूरी है। उन्होंने निजी अस्पतालों और आमजन से योजनाओं से जुड़कर सड़क दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने की अपील की।
संगोष्ठी में बताया गया कि पीएम राहत योजना के तहत मोटर वाहन से हुई सड़क दुर्घटना के पीड़ित को अधिकतम 1.50 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा। दुर्घटना की तारीख से अधिकतम सात दिनों तक उपचार की सुविधा उपलब्ध होगी। दुर्घटना होने पर तत्काल 112 या 108 पर सूचना देकर घायल को अस्पताल पहुंचाया जा सकता है।
राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने बताया कि देहरादून जिले के 80 सरकारी और निजी अस्पताल अब तक योजना के तहत सूचीबद्ध हैं। संगोष्ठी में शामिल 130 से अधिक अन्य अस्पतालों को भी पोर्टल पर पंजीकृत कर योजना से जोड़ा जाएगा।
नेक राहवीर को 25 हजार तक पुरस्कार
सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की निस्वार्थ मदद कर उसकी जान बचाने वाले नागरिक को नेक राहवीर कहा जाता है। ऐसे लोगों को राज्य स्तर पर 25 हजार रुपये तक का पुरस्कार, प्रमाणपत्र और स्मृति चिह्न देने का प्रावधान है। जिला स्तर पर भी नेक राहवीर को 5 हजार रुपये की पुरस्कार राशि दी जा सकती है। दुर्घटना के बाद का पहला एक घंटा ‘स्वर्णिम घंटा’ माना जाता है, जिसमें समय पर उपचार मिलने से घायल की जान बचाई जा सकती है।
योजना के तहत नेक राहवीर को अस्पताल में रुकने, अपना नाम-पता या व्यक्तिगत विवरण देने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। पुलिस भी आवश्यक पूछताछ एक बार में पूरी करेगी और मददगार की इच्छा पर उसकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार कर लोगों को जागरूक किया जाएगा और इनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संबंधित विभागों के बीच नियमित समन्वय एवं निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। कार्यक्रम में चिकित्सा स्वास्थ्य निदेशक खड़क सिंह दातात, संयुक्त परिवहन आयुक्त राजीव मेहरा, संभागीय परिवहन अधिकारी डॉ. अनिता चमोला, अपर जिलाधिकारी स्मृता परमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।







