दिल बेचारा’ से ग्लोबल मंच तक

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किज़ी बसु से ‘कड़क सिंह’ की साक्षी तक निभाए विविध किरदार, यूथ एडवोकेसी और सामाजिक बदलाव की भी बनीं मजबूत आवाज

मुंबई 02 सितंबर 2026। साल 2020 में फिल्म ‘दिल बेचारा’ के साथ बतौर लीड एक्ट्रेस दर्शकों के दिलों में जगह बनाने वाली संजना सांघी ने छह साल के अपने सफर में अभिनय के साथ-साथ ग्लोबल यूथ एडवोकेसी और सामाजिक बदलाव के क्षेत्र में भी अलग पहचान बनाई है। किज़ी बसु के भावनात्मक किरदार से मिली लोकप्रियता के बाद संजना ने खुद को किसी एक तरह की भूमिका तक सीमित नहीं रखा और लगातार अलग-अलग जॉनर की कहानियों को चुना।

‘दिल बेचारा’ में उनकी मासूमियत और भावनात्मक अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा। इसके बाद एक्शन थ्रिलर ‘ओम: द बैटल विदिन’ में उन्होंने काव्या के किरदार के जरिए अपना अलग अंदाज दिखाया। वहीं, ‘कड़क सिंह’ में पंकज त्रिपाठी के साथ साक्षी के किरदार में उनकी संवेदनशील और जटिल भावनाओं को पर्दे पर उतारने की क्षमता की भी सराहना हुई।
संजना की पहचान केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रही। वह युवाओं और सामाजिक बदलाव से जुड़े मुद्दों पर ग्लोबल मंचों पर भी सक्रिय रही हैं। वह संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने वाली युवा भारतीय आवाजों में शामिल रही हैं और यूथ-लेड डेवलपमेंट से जुड़े विषयों पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी बात रखती रही हैं।
वह मिलेनियम कैंपस नेटवर्क के बोर्ड ऑफ एडवाइजर्स से भी जुड़ी रही हैं और ग्लोबल यूथ डेवलपमेंट से जुड़े मुद्दों पर काम कर चुकी हैं। इसके अलावा, यूएन के सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स से संबंधित पहलों में भी उनकी भागीदारी रही है।
कोरोना महामारी के दौरान संजना ने युवाओं को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े संसाधनों और विशेषज्ञों तक पहुंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘हियर टू हियर’ नाम की क्राइसिस रिस्पॉन्स पहल शुरू की। वह जेंडर इक्वालिटी, मेंस्ट्रुअल हाइजीन और यूथ-लेड सोशल इनोवेशन जैसे विषयों पर भी लगातार अपनी बात रखती रही हैं।
छह साल के अपने सफर में संजना सांघी ने यह साबित किया है कि एक कलाकार की पहचान केवल पर्दे पर निभाए गए किरदारों से नहीं बनती। अभिनय में विविधता के साथ सामाजिक सरोकारों और युवाओं की आवाज बनने की उनकी कोशिश ने उन्हें एक अलग पहचान दी है।
किज़ी बसु से लेकर साक्षी तक और सिनेमा से ग्लोबल मंचों तक, संजना सांघी का सफर प्रतिभा, सोच-समझकर किए गए रचनात्मक चुनावों और समाज के लिए सकारात्मक बदलाव की प्रतिबद्धता की कहानी बन चुका है।अगर चाहें तो मैं इसे और ज्यादा अखबारी, अमर उजाला/दैनिक जागरण स्टाइल में भी बना सकता हूँ।

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