पटना 02 सितंबर 2026। मोटापे, वजन प्रबंधन और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती जागरूकता अब देश के प्रमुख महानगरों तक सीमित नहीं रह गई है। बिहार और झारखंड में भी लोग वैज्ञानिक प्रमाणों और चिकित्सकीय सलाह पर आधारित वजन प्रबंधन उपचारों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं।
सिप्ला के टिरज़ेपाटाइड ब्रांड युरपीक (Yurpeak®) ने बिहार और झारखंड में महीने-दर-महीने 20.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। कंपनी के अनुसार, यह वृद्धि क्षेत्र में उन्नत मोटापा प्रबंधन उपचारों की बढ़ती स्वीकार्यता और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के प्रति लोगों की बदलती सोच को दर्शाती है।
हाल के बाजार रुझानों के अनुसार, कई सेमाग्लूटाइड ब्रांडों के आने के साथ मोटापा प्रबंधन का क्षेत्र लगातार विस्तार कर रहा है। इसके बावजूद, चिकित्सकों और मरीजों के बीच टिरज़ेपाटाइड आधारित उपचारों की मांग बनी हुई है। बिहार और झारखंड में युरपीक की बढ़ती मांग को प्रमुख शहरी केंद्रों से बाहर आधुनिक मोटापा प्रबंधन उपचारों के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि उपचार से जुड़े फैसले अब केवल लागत के आधार पर नहीं लिए जा रहे हैं। मरीज उपचार के संभावित लाभ, स्वास्थ्य परिणामों और लंबे समय के स्वास्थ्य लक्ष्यों को भी प्राथमिकता दे रहे हैं। मोटापे और मेटाबॉलिक विकारों के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ अधिक लोग चिकित्सकीय निगरानी में टिकाऊ वजन प्रबंधन के विकल्प अपना रहे हैं।
डायबिटीज और ओबेसिटी केयर सेंटर के एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. सुभाष कुमार ने कहा कि लोगों के स्वास्थ्य को देखने के नजरिये में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। उनके अनुसार, मरीज अब केवल कम समय में वजन घटाने के बजाय लंबे समय तक बेहतर स्वास्थ्य पर ध्यान दे रहे हैं। पोषण, शारीरिक गतिविधि, वजन प्रबंधन और संपूर्ण मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को लेकर मरीजों की जागरूकता बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि लोग पहले ही चिकित्सकीय सलाह लेने और जीवनशैली में स्थायी बदलाव करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं। यह बदलाव रोकथाम आधारित स्वास्थ्य सोच को मजबूत करता है।
बिहार और झारखंड में युरपीक की दर्ज की गई वृद्धि उभरते बाजारों में टिरज़ेपाटाइड की बढ़ती स्वीकार्यता का संकेत देती है। साथ ही यह भी दर्शाती है कि लोग लंबे समय तक वजन प्रबंधन और बेहतर मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के लिए चिकित्सकीय मार्गदर्शन में उपचार विकल्पों के प्रति अधिक रुचि दिखा रहे हैं।








