
brp_del_th:null;
brp_del_sen:null;
delta:null;
module: photo;hw-remosaic: false;touch: (-1.0, -1.0);sceneMode: 8;cct_value: 0;AI_Scene: (-1, -1);aec_lux: 0.0;aec_lux_index: 0;HdrStatus: auto;albedo: ;confidence: ;motionLevel: -1;weatherinfo: null;temperature: 40;
देहरादून 16 अप्रैल। उत्तराखण्ड के सार्वजनिक निगमों, निकायों और उपक्रमों में कार्यरत दैनिक वेतन, संविदा, उपनल, आउटसोर्स व विशेष श्रेणी के कार्मिकों ने अपनी लंबित मांगों के निराकरण न होने पर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। राज्य निगम कर्मचारी अधिकारी महासंघ ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर स्पष्ट किया है कि वर्ष 2025 से लगातार विभिन्न पत्रों के माध्यम से नियमितीकरण सहित अन्य मांगों के समाधान के लिए अनुरोध किया जाता रहा, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
महासंघ के अनुसार प्रमुख मांगों में संविदा, उपनल, आउटसोर्स व दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का शीघ्र नियमितीकरण कर सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना, सार्वजनिक निगमों में रिक्त पदों को भरना और संरचनात्मक पुनर्गठन करना शामिल है। इसके साथ ही ठेकेदारी प्रथा समाप्त करने, वेतन विसंगति समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक करने, एसीपी व एमएसीपी की पूर्व व्यवस्था लागू करने और न्यायालयों के आदेशों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई है। वर्ष 2014 के बाद नियुक्त कार्मिकों को पेंशन सुविधा देने, गोल्डन कार्ड के तहत चिकित्सा सुविधाओं में सुधार, लंबित चिकित्सा प्रतिपूर्ति का भुगतान, पदोन्नति प्रक्रिया को सरल बनाने और महासंघ को परिसंघ के रूप में मान्यता देने की मांग भी प्रमुख है।
महासंघ की कार्यसमिति की 10 अप्रैल 2026 को देहरादून में हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि यदि सरकार द्वारा शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं की गई तो चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। घोषित कार्यक्रम के तहत 16 अप्रैल को प्रेस कॉन्फ्रेंस, 23 अप्रैल को हल्द्वानी बस अड्डे पर धरना-प्रदर्शन, 30 अप्रैल को हरिद्वार स्थित गढ़वाल मंडल विकास निगम कार्यालय में प्रदर्शन तथा 12 मई 2026 से देहरादून के एकता विहार में क्रमिक अनशन शुरू किया जाएगा।महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि इसके बाद भी सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।








