
लखनऊ 14 जनवरी। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पर्वतीय महापरिषद द्वारा आयोजित उत्तरायणी कौथिग में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सहभागिता की। इस अवसर पर उन्होंने उत्तरायणी, मकर संक्रांति और घुघुतिया पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उत्तरायणी केवल लोकपर्व नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और अपनी जड़ों से जुड़ाव का सशक्त प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ में आयोजित यह कौथिग उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की साझा सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का सशक्त मंच है। लोकगीत, लोकनृत्य, लोकभूषा, हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों के माध्यम से न केवल परंपराएं जीवित रहती हैं, बल्कि स्थानीय शिल्पकारों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘एक भारत–श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प की जीवंत मिसाल बताया।
मुख्यमंत्री धामी ने पर्वतीय महापरिषद के 25 वर्षों के सामाजिक, सांस्कृतिक और सेवा कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संस्था ने उत्तर प्रदेश में रह रहे हजारों उत्तराखंडवासियों को एक सूत्र में बांधकर उनकी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने का उल्लेखनीय कार्य किया है। रजत जयंती वर्ष में प्रवेश संस्था के समर्पण का प्रमाण है।
उन्होंने लखनऊ से अपने भावनात्मक संबंधों को साझा करते हुए कहा कि यह शहर उनकी कर्मभूमि रहा है, जहां से उन्होंने जनसेवा का संकल्प लिया। उत्तरायणी जैसे आयोजनों में लखनऊ आना उनके लिए अपनी कर्मभूमि को नमन करने जैसा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भारत विकास के साथ अपनी संस्कृति और आस्था को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित कर रहा है। काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, महाकाल लोक और अयोध्या में श्रीराम मंदिर जैसे कार्य इसी दृष्टि का परिणाम हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड सरकार विकास और विरासत को साथ लेकर चल रही है। केदारनाथ-बद्रीनाथ मास्टर प्लान, केदारखंड व मानसखंड मंदिर माला मिशन, हरिद्वार–ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर, हरिपुर यमुना कॉरिडोर और विभिन्न धार्मिक कॉरिडोर परियोजनाओं से आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को नई भव्यता मिल रही है।
पर्यटन और आर्थिक विकास पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड अब केवल तीर्थाटन तक सीमित नहीं है। नई नीतियों से राज्य वेडिंग डेस्टिनेशन, एडवेंचर हब और फिल्म शूटिंग डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है। ‘वेड इन उत्तराखंड’ और शीतकालीन पर्यटन अभियानों से आर्थिकी को नया बल मिला है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य गठन के बाद से उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था 26 गुना बढ़ी है। प्रतिव्यक्ति आय 17 गुना बढ़कर ₹2.74 लाख तक पहुंच गई है। बजट ₹4,000 करोड़ से बढ़कर ₹1 लाख करोड़ के पार हो चुका है। पलायन निवारण आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 44 प्रतिशत रिवर्स पलायन हुआ है, जबकि लखपति दीदी योजना से 1.68 लाख महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं।
उन्होंने बताया कि सरकार देवभूमि की अस्मिता और सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठा रही है। अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई, सख्त भू-कानून, समान नागरिक संहिता लागू करना, नकल विरोधी कानून और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के जरिए हजारों युवाओं को रोजगार मिला है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यही नया उत्तराखंड है—जहां विकास, विश्वास और अवसर साथ-साथ हैं। उन्होंने देवभूमि उत्तराखंड को देश का अग्रणी राज्य बनाने के “विकल्प रहित संकल्प” को दोहराते हुए सभी से सहयोग और आशीर्वाद की अपील की।
कार्यक्रम में पर्वतीय महापरिषद के पदाधिकारी, बड़ी संख्या में प्रवासी उत्तराखंडी और स्थानीय लोग उपस्थित रहे।







