डी.फार्मा/बी.फार्मा में एडमिशन से पहले अनिवार्य दस्तावेज़ों की जांच करें: परिषद ने सभी संस्थानों को जारी की चेतावनी

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देहरादून 10 दिसंबर।
फार्मेसी अधिनियम 1948 की विभिन्न धाराओं और शैक्षणिक विनियमों (1992, 1994, 2014) के उल्लंघन पर गंभीर संज्ञान लेते हुए परिषद ने राज्य के सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। परिषद ने कहा है कि कई संस्थान नियमों के विपरीत डी.फार्मा और बी.फार्मा पाठ्यक्रमों में ऐसे छात्रों को भी प्रवेश दे रहे हैं, जो इंटरमीडिएट की अनिवार्य विज्ञान विषयों में उत्तीर्ण नहीं हैं।

परिषद ने स्पष्ट किया है कि डी.फार्मा/बी.फार्मा में प्रवेश के लिए इंटरमीडिएट में विज्ञान संकाय के विषय—अंग्रेज़ी, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान/गणित—में पृथक-पृथक उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। इसके बावजूद कुछ संस्थान अनिवार्य विषयों में अनुत्तीर्ण अभ्यर्थियों को प्रवेश दे रहे हैं, जिससे बाद में छात्रों का पंजीकरण निरस्त हो जाता है।

परिषद के अनुसार कई छात्र दो वर्षीय डिप्लोमा या चार वर्षीय डिग्री पूर्ण करने के बाद पंजीकरण के लिए कार्यालय में आते हैं, लेकिन अनिवार्य पात्रता पूरी न होने के कारण उनका पंजीकरण नहीं हो पाता। इससे छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है और आर्थिक हानि भी हो रही है। इस मुद्दे पर कई छात्रों ने उच्च न्यायालय नैनीताल में याचिका भी दायर की है।

परिषद ने सभी कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों को चेतावनी देते हुए कहा है कि भविष्य में गलत पात्रता के आधार पर प्रवेश दिया गया तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित संस्थान की होगी।

साथ ही सभी संस्थानों से अपेक्षा की गई है कि प्रवेश देने से पहले छात्रों के सभी दस्तावेजों की गहन जांच अवश्य करें, ताकि किसी छात्र का भविष्य खराब न हो और फार्मेसी शिक्षा नियमों का पूर्ण पालन सुनिश्चित हो सके।परिषद ने स्पष्ट कहा है—भविष्य में गलत प्रवेश पाए जाने पर संस्थान स्वयं जिम्मेदार होंगे।

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