देहरादून 22 नवम्बर ।चिकित्सा शिक्षा विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग उत्तराखण्ड द्वारा 17 और 18 नवंबर को नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती हेतु जारी विज्ञापनों के बाद स्थानीय प्रशिक्षित बेरोजगार नर्सिंग अभ्यर्थियों में तीव्र असंतोष देखने को मिल रहा है। अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया में संशोधन की मांग उठाते हुए कहा कि मौजूदा भर्ती प्रणाली स्थानीय उम्मीदवारों के साथ न्याय नहीं कर रही है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि वर्ष 2020 की भर्ती पूरी होने में पाँच वर्ष का समय बीत गया, जिसके चलते कई उम्मीदवार दो-दो बार चयनित हो गए, जबकि अनेक स्थानीय अभ्यर्थियों को एक भी मौका नहीं मिल पाया। अब पुनः परीक्षा आधारित भर्ती निकाले जाने से कई ऐसे उम्मीदवार, जो उम्र सीमा पार कर चुके हैं, सरकारी सेवा से बाहर हो जाएंगे।अभ्यर्थियों ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के 587 पदों और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के 103 बैकलॉग पदों—कुल 690 पदों वाले विज्ञापन को वापस लेने की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगों मे भर्ती प्रक्रिया वर्षवार (सीनियरिटी) के आधार पर की जाए, नए पद स्वीकृत कर कुल संख्या न्यूनतम 1500 की जाए, ओवर-एज हो चुके अभ्यर्थियों को दो वर्ष की आयु सीमा में छूट दी जाए। साथ ही अभ्यर्थियों ने यह भी आपत्ति जताई कि 11 मार्च 2024 के बाद अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों द्वारा उत्तराखण्ड नर्सिंग काउंसिल में कराए गए रजिस्ट्रेशन को नई भर्ती में मान्य न किया जाए। उनका कहना है कि इससे स्थानीय अभ्यर्थियों के अवसर प्रभावित हो रहे हैं।
अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि वर्षवार और पारदर्शी आधार पर भर्ती प्रक्रिया शीघ्र शुरू नहीं की गई, तो राज्य में बेरोजगारी का संकट और गहरा सकता है।








