देहरादून 4 नवंबर। सहकारिता विभाग ने उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में 25 वर्षों के दौरान उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। सहकारी संस्थाओं के माध्यम से किसानों, महिलाओं, काश्तकारों, कारीगरों और युवाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के साथ-साथ पलायन रोकने के उद्देश्य से अनेक योजनाएं संचालित की गई हैं। मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना और माधो सिंह भंडारी सहकारी सामूहिक खेती योजना जैसी अभिनव योजनाओं ने सहकारिता को जनांदोलन का स्वरूप प्रदान किया है।11 लाख लाभार्थियों को 6957 करोड़ का ब्याज मुक्त ऋण ।विभाग के अंतर्गत संचालित दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना के तहत वर्ष 2017 से सितंबर 2025 तक 11.34 लाख लाभार्थियों और 6413 स्वयं सहायता समूहों को कुल 6957.88 करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त ऋण वितरित किया गया है। सहकारी संघ द्वारा 239 क्रय केंद्रों के माध्यम से 67171.92 क्विंटल मिलेट्स की खरीद कर 26.52 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को किया गया। वहीं, मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना के तहत 182 समितियों के माध्यम से 555582 मीट्रिक टन सायलेज वितरित कर 54 हजार महिलाओं को लाभान्वित किया गया है।प्रशासनिक और तकनीकी सुधारों से बढ़ी पारदर्शिता
विभाग ने सहकारी संस्थागत सेवामंडल, सहकारी न्यायाधिकरण और सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण का गठन कर प्रशासनिक ढांचे को सुदृढ़ बनाया है। राज्य की सभी 670 पैक्स समितियों का कंप्यूटरीकरण किया जा चुका है, जिससे कार्यों में पारदर्शिता और गति आई है। 23 एमपैक्स जन औषधि केंद्र और 650 सहकारी समितियां जन सुविधा केंद्र (सीएससी) के रूप में कार्य कर रही हैं। 478 पैक्स में प्रधानमंत्री समृद्धि केंद्र भी स्थापित किए गए हैं। सहकारी समितियों और बैंकों की प्रबंध समितियों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देकर महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया गया है।
सहकारिता बनी आत्मनिर्भर उत्तराखंड की आधारशिला
ठोस रणनीति और सुशासन के चलते सहकारी बैंकों का एनपीए राज्य गठन के समय 4838.16 लाख रुपये से घटकर 690.30 लाख रुपये रह गया है। सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन सुनिश्चित करते हुए राज्य सरकार सहकारिता को जनांदोलन के रूप में विकसित कर रही है। सहकारिता के माध्यम से आत्मनिर्भर उत्तराखंड के लक्ष्यों को साकार करने का संकल्प राज्य सरकार ने लिया है।








