नई दिल्ली 24 मार्च ।
नेशनल हाउसिंग बैंक (एनएचबी) ने घर के लिए लोन देने वाली हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों को जमकर फटकार लगाई है। ये कंपनियां घर के लोन के साथ बीमा पॉलिसी बेच (मिस-सेलिंग) रही हैं। एनएचबी ने इन कंपनियों को साफ-साफ हिदायत दी है कि लोन के साथ बीमा पॉलिसी जबरदस्ती ना थोपें। लोगों को पॉलिसी की शर्तें अच्छे से बताने का कहा है।
लोगों ने कई तरह की शिकायतें की हैं। लोन के साथ जो बीमा पॉलिसी बेची जा रही थीं, उनकी शर्तें लोगों को पता ही नहीं थीं। कई मामलों में तो बीमा की अवधि लोन की अवधि से भी कम थीं। एनएचबी ने देखा कि कई हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों के पास बीमा बेचने के लिए बोर्ड से मंजूरी प्राप्त नीतियां ही नहीं थीं। ये कंपनियां एक ही शख्स को कई तरह के बीमा बेच रही थीं। इनमें टर्म लाइफ इंश्योरेंस, बिल्डिंग इंश्योरेंस, क्रिटिकल इलनेस कवरेज, हॉस्पिटलाइजेशन बेनिफिट्स और डिसेबिलिटी इंश्योरेंस जैसे बीमे शामिल हैं।
एनएचबी ने नोटिस किया कि कुछ बीमा तो लोन लेने वालों के लिए जरूरी ही नहीं थे। एनएचबी ने पाया कि कई बार तो ग्राहकों से बीमा देने से पहले मंजूरी ही नहीं ली गई। और जब मंजूरी ली भी गई, तो कई बार प्रीमियम की रकम और पॉलिसी की शर्तें मंजूरी के फॉर्म में साफ-साफ नहीं लिखी हुई थीं।
जनवरी में एनएचबी ने एचएफसी के सीईओ को पहले ही आगाह कर दिया था। एनएचबी की चिंता है कि इन फाइनैंस कंपनियों की कुल कमाई में बीमा से होने वाली कमाई का हिस्सा बहुत ज्यादा है। एनएचबी के लेटर में एचएफसी की जांच के दौरान मिली कमियों के बारे में बताया गया है। इनमें सबसे बड़ी कमी है लोगों को लोन के साथ बीमा पॉलिसी बेचने का गलत तरीका (मिस-सेलिंग) है। दरअसल जनवरी में एनएचबी के अधिकारियों और एचएफसी के सीईओ की मीटिंग हुई थी। उसमें एनएचबी ने चिंता जताई थी कि ये कंपनियां बीमा बेचकर बहुत अधिक पैसा कमा रही हैं। कुछ मामलों में तो बीमा की अवधि लोन की अवधि से कम थी। इससे शक हुआ कि बीमा कवरेज देने के लिए नहीं, सिर्फ ज्यादा बीमा बेचने के लिए बेचा जा रहा है।
एनएचबी ने 12 मार्च और 10 दिसंबर 2024 को दो अलग-अलग नोटिस जारी करके हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (एचएफसी) को ये निर्देश दिए हैं। उनसे कहा गया है कि वे ग्राहकों से पहले साफ-साफ मंजूरी लें। इसके साथ ही कम से कम दो कंपनियों के बीमा के विकल्प दो। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और कीमतें भी कम होंगी। एनएचबी के लेटर में साफ लिखा है कि एचएफसी को लोन के साथ बीमा बेचने के गलत तरीके से बचना चाहिए। एनएचबी ने जोर देकर कहा है कि बीमा बेचने से पहले ग्राहक से अलग से मंजूरी लेनी होगी। कम से कम दो बीमा कंपनियों के विकल्प देने होंगे। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी। एनएचबी ने लोन के साथ बीमा बेचने के गलत तरीके पर एक स्टडी की है। इस स्टडी के नतीजे आरबीआई की इंटर रेगुलेटरी फोरम मीटिंग और आईआरडीएआई (बीमा नियामक) की अर्ली वॉर्निंग ग्रुप मीटिंग में शेयर किए गए। ये बात भारत में आवास पर रिपोर्ट जारी करते हुए नियामक ने बताई।





