सरकारी स्कूलों से विमुख हो रहे छात्र!

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देहरादून 28 फरवरी।
विकासनगर। जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने पत्रकार वार्ता करते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों में घटती छात्र संख्या निश्चित तौर पर प्रदेश में शिक्षा के गिरते स्तर एवं सरकार की नाकामी को दर्शाती है। आखिर सरकार वर्षों से इस मामले में क्यों खामोश है। क्यों इस ओर सरकार का ध्यान नहीं है। नेगी ने कहा कि जो आंकड़ा सामने आया है उसमें 130 विद्यालयों में एक-एक छात्र, 267 विद्यालयों में दो-दो छात्र ,324 विद्यालयों में तीन-तीन छात्र, 361 में चार-चार छात्र, 423 विद्यालयों में पांच-पांच छात्र व इसी प्रकार 6 से 10 छात्रों वाले विद्यालयों की भी संख्या सैकडों में है। नेगी ने तंज कसते में कहा कि ऐसे में देश को विश्व गुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता। नेगी ने कहा कि आज प्रदेश का अभिभावक इन सरकारी विद्यालयों (अधिकांश)से विमुख होता जा रहा है, जिसका सबसे बड़ा कारण शिक्षक व सरकारी सिस्टम है। सरकारी सिस्टम के तहत अध्यापकों पर शिक्षण कार्य के अतिरिक्त इतने अन्य कार्य थोपे गए हैं कि शिक्षक को पढाने का समय ही नहीं मिलता। इसके साथ-साथ अध्यापक इसलिए दोषी हैं कि पहाड़ों में कोई पढाना नहीं चाहता तथा अपने ट्रांसफर-पोस्टिंग के चक्कर में दिन-महीने-वर्ष व्यतीत कर रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण एक यह भी है कि सिफारिश वाले अति दुर्गम से सुगम में अपना तबादला करवा लेते हैं, वहीं दूसरी ओर सिफारिशविहीन शिक्षक कई-कई वर्षों दुर्गम में ही कट काट लेते हैं। ऐसे में यह भेदभाव भी शिक्षक को लापरवाह बना देता है। इस मामले में काफी हद तक पलायन भी कारक है‌
नेगी ने कहा कि सरकार को चाहिए कि पहाड़ों में प्राइवेट विद्यालय खोलने में ज्यादा से ज्यादा उनको सुविधा प्रदान करें एवं आरटीई के तहत दाखिलों निर्धारित कोटा 25% से बढ़कर लगभग 40 फ़ीसदी करें, जिससे बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुझान बढ़े एवं सरकार का हो रहा करोड़ों रुपए बर्बाद होने से बच सके।पत्रकार वार्ता में हाजी असद व प्रवीण शर्मा पिन्नी मौजूद थे।

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