
देहरादून 2 अक्टूबर ।राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के अवसर पर गांधी पार्क में इतिहास संकलन समिति की ओर से श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। कार्यक्रम में देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय के विधि संकायाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार दीक्षित ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि धार्मिक एवं सामाजिक विचारों का समूह ही वास्तविक गांधीवाद है, जो आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना गांधीजी के जीवनकाल में था।
गांधीवाद पर विचार रखते हुए डॉ. दीक्षित ने कहा कि वैश्वीकरण और सामाजिक असहिष्णुता के दौर में महात्मा गांधी के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक और उपयोगी हो गए हैं। गांधीजी का मानना था कि पृथ्वी पर मनुष्य की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पर्याप्त संसाधन हैं, लेकिन लालच के लिए नहीं।
उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के शोषण का अहिंसक प्रतिरोध, दूसरों की सेवा को प्राथमिकता देना, संचय से पहले त्याग, झूठ के स्थान पर सत्य तथा व्यक्तिगत हित से ऊपर देश और समाज की चिंता करना गांधीवाद के मूल विचारों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि गांधीवादी विचारों को व्यापक रूप से प्राचीन भारतीय दर्शन से प्रेरणा मिली है। वर्तमान समय में दुनिया में बढ़ते तनाव और हिंसक माहौल के बीच गांधीजी का अहिंसा का सिद्धांत विवादों के समाधान का प्रभावी मार्ग बन सकता है।
वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर डॉ. दीक्षित ने कहा कि गांधीजी ऐसी शिक्षा के पक्षधर थे, जो केवल व्यक्ति को साक्षर न बनाए, बल्कि उसे आत्मनिर्भर और व्यावहारिक रूप से सक्षम भी बनाए।
श्रद्धांजलि सभा में मीना तिवारी, डॉ. सुनील कुमार, क्रिश तिवारी, साधना, अधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद, संदीप राजभर सहित अन्य लोग मौजूद रहे।







