स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही पर डीएम सख्त

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मातृ एवं शिशु मृत्यु के 12 मामलों की समीक्षा, चार में मांगी आख्या; अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों की होगी जीआईएस मैपिंग

देहरादून, 30 सितंबर। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए देहरादून में अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों को चिह्नित कर वहां स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत मातृ मृत्यु, शिशु मृत्यु और राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को ठोस कार्ययोजना बनाकर परिणाम आधारित काम करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने कहा कि मातृ एवं शिशु मृत्यु की रोकथाम के लिए टास्क फोर्स गठित की जाए और गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच के साथ उनकी गहन निगरानी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण कर जीआईएस मैपिंग के माध्यम से उन क्षेत्रों को चिह्नित करने के निर्देश दिए, जहां लगातार मृत्यु दर अधिक रही है। ऐसे क्षेत्रों के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार कर स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार किया जाएगा।

12 मामलों की समीक्षा, चार में मांगी आख्या

वर्ष 2026 में अब तक प्रसव के दौरान या प्रसव के कुछ समय बाद हुई 12 महिलाओं की मृत्यु के मामलों की जिलाधिकारी ने गहन समीक्षा की। चार मामलों में उन्होंने संबंधित अधिकारियों से स्पष्ट आख्या मांगी। प्रेमनगर निवासी रुखसाना की मृत्यु के मामले में आशा और एएनएम के स्पष्टीकरण में विरोधाभास, आंकड़ों में छेड़छाड़ और साक्ष्य के लिए गलत तिथि के फोटो प्रस्तुत किए जाने की बात सामने आई। इस पर जिलाधिकारी ने एएनएम के निलंबन की कार्रवाई के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि आमजन की जिंदगी से खिलवाड़ किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दूरस्थ क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं पर विशेष ध्यान देने, आवश्यकता के अनुसार प्रसव से पहले अस्पताल में भर्ती कराने और सभी जरूरी जांच समय पर कराने के निर्देश दिए गए। गर्भावस्था के दौरान जोखिम सामने आने पर महिला को तत्काल उच्च स्वास्थ्य संस्थान रेफर करने तथा घर पर होने वाले प्रसव के मामलों में आशा कार्यकत्री की जिम्मेदारी तय करने को भी कहा।

टीबी जांच का दायरा बढ़ाने के निर्देश
राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने जनसंख्या के अनुपात में अपेक्षित जांच और एक्स-रे नहीं होने पर नाराजगी जताई। उन्होंने टीबी जांच का दायरा बढ़ाने और निजी क्षेत्र को भी अभियान से जोड़कर अधिक से अधिक लोगों की जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस दौरान टीबी से मुक्त हो चुके लोगों और टीबी रोकथाम के लिए जनजागरूकता में योगदान देने वाले पांच टीबी चैंपियनों को सम्मानित किया गया।
कई स्वास्थ्य संकेतकों में देहरादून बेहतर
बैठक में बताया गया कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के कई महत्वपूर्ण संकेतकों में देहरादून राज्य और राष्ट्रीय औसत से बेहतर स्थिति में है। एचआईएमएस 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार जिले का मातृ मृत्यु अनुपात 31.0 है, जबकि उत्तराखंड में यह 99 और राष्ट्रीय स्तर पर 97 है। नवजात शिशु मृत्यु दर देहरादून में 10.4 है, जबकि राज्य में 13 और राष्ट्रीय स्तर पर 20 है। इसी तरह शिशु मृत्यु दर 13.8 है, जबकि राज्य में 19 और राष्ट्रीय स्तर पर 28 है। पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर भी देहरादून में 16.0 है, जबकि उत्तराखंड में 21 और राष्ट्रीय स्तर पर 32 है।
हालांकि, जन्म के समय लिंगानुपात 924.4 होने के कारण जिले में इस क्षेत्र में सुधार की जरूरत बताई गई। यह उत्तराखंड के 984 और राष्ट्रीय औसत 929 से कम है।
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एमके शर्मा, गायनी विशेषज्ञ डॉ. ज्योति शर्मा, कार्यक्रम अधिकारी प्रखर, विभिन्न अस्पतालों के वरिष्ठ चिकित्सक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के चिकित्सा अधिकारी, एएनएम और आशा कार्यकत्रियां मौजूद रहीं।

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