
देहरादून 24 सितंबर। नीट-यूजी 2025 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के मामले में देहरादून पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने एक और आरोपी धीरज कुमार श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उसके कब्जे से 5.58 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं।एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोभाल ने प्रेस वार्ता में बताया कि पूछताछ में आरोपी ने बताया कि यह रकम उसे पूर्व में गिरफ्तार रूपेश पंडित ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे से कुछ छात्रों को एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के एवज में कमीशन के तौर पर दी थी।इस मामले में 13 सितंबर को थाना रायपुर और क्लेमेंटाउन में अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए थे। आरोप था कि अभ्यर्थियों ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन में कूटरचित दस्तावेज लगाए थे। जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने पुलिस अधीक्षक ग्रामीण-1 जया बलोनी के नेतृत्व में एसआईटी गठित की।
एसआईटी ने जांच के दौरान मामले से जुड़े दस्तावेज कब्जे में लेकर संबंधित शिक्षण संस्थानों से भी रिकॉर्ड जुटाए। जांच में अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों में दर्ज पते गलत पाए गए। दस्तावेजों की पड़ताल में उनके वास्तविक पते और मामले से जुड़े अन्य तथ्य सामने आए। पुलिस ने 21 सितंबर को इस मामले में रूपेश पंडित और अरविंद कुमार को गिरफ्तार किया था। रूपेश की निशानदेही पर मेरठ स्थित उसके घर से फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने के एवज में लिए गए आठ लाख रुपये भी बरामद किए गए थे।
जांच में सामने आया कि भोपाल निवासी धीरज कुमार श्रीवास्तव इंद्रपुरी क्षेत्र में ‘एमबीबीएस वे’ नाम से कार्यालय चलाता था और निजी विश्वविद्यालयों में एमबीबीएस समेत विभिन्न पाठ्यक्रमों में कमीशन के आधार पर दाखिला दिलाने का काम करता था। पुलिस के मुताबिक करीब दो साल पहले उसकी मुलाकात रूपेश पंडित से उत्तरकाशी के एक आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज में हुई थी, जिसके बाद दोनों लगातार संपर्क में थे।
पुलिस के अनुसार, अरविंद कुमार ने अपनी पुत्री और दो अन्य परिचितों के बच्चों के एमबीबीएस में दाखिले के लिए रूपेश से संपर्क किया था। इसके बाद रूपेश ने धीरज से बात की। आरोप है कि कम अंक वाले अभ्यर्थियों के दाखिले के लिए उत्तराखंड में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे का इस्तेमाल करने की योजना बनाई गई। धीरज ने रूपेश और अन्य साथियों के साथ मिलकर तीन अभ्यर्थियों के कूटरचित दस्तावेज तैयार करवाकर फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाए। इन्हीं प्रमाणपत्रों के आधार पर तीनों अभ्यर्थियों ने अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस में दाखिला लिया।
एसआईटी मामले से जुड़े सभी पहलुओं की गहनता से जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि विवेचना में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर मामले में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। गिरफ्तार आरोपी धीरज कुमार श्रीवास्तव की उम्र 37 वर्ष है और वह भोपाल का रहने वाला है। मामले में अब तक धीरज से 5 लाख 58 हजार 100 रुपये और रूपेश पंडित की निशानदेही पर आठ लाख रुपये नकद बरामद किए जा चुके हैं।









