न्यायपालिका ही विधि की सर्वोच्च संस्था : जस्टिस सुभाष चंद

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देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय के विधि छात्रों को सिविल जज बनने के दिए गुरुमंत्र

देहरादून 23 सितंबर ।देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय में आयोजित विधि सेमिनार में झारखंड हाईकोर्ट के निवर्तमान न्यायाधीश जस्टिस सुभाष चंद ने विधि के छात्रों को न्यायपालिका और कानून की व्याख्या से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका विधि की सर्वोच्च संस्था है और अदालतें समय-समय पर नए निर्णयों के माध्यम से कानून की व्याख्या करती हैं। उन्होंने छात्रों को सिविल जज बनने के लिए निरंतर अध्ययन, अनुशासन और मेहनत को सफलता की कुंजी बताया।

मानवाधिकार विषय पर व्याख्यान देते हुए जस्टिस सुभाष चंद ने कहा कि प्रतिष्ठा, समानता और स्वतंत्रता भारतीय संविधान द्वारा नागरिकों को दिए गए बुनियादी अधिकार हैं। ये अधिकार व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, नैतिक और आध्यात्मिक विकास के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने विधि छात्रों से संविधान और न्यायिक निर्णयों का गहन अध्ययन करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और गणेश वंदना के साथ हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजय कुमार, प्रतिकुलपति प्रो. ऋतिका मेहरा, विधि विभाग के संकायाध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार दीक्षित और मुख्य अतिथि जस्टिस सुभाष चंद मौजूद रहे।

जस्टिस सुभाष चंद का स्वागत करते हुए प्रो. अनिल कुमार दीक्षित ने कहा कि जस्टिस सुभाष चंद ने एक सामान्य परिवार से निकलकर अपनी मेहनत और लगन के बल पर न्यायपालिका में महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया। उन्होंने कहा कि उनका जीवन विधि के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी है।

मुख्य अतिथि ने विश्वविद्यालय में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विधि छात्रों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया और उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने छात्रों को न्यायिक सेवा की तैयारी से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।

सेमिनार में स्कूल ऑफ लॉ के शिक्षक डॉ. गौरव त्यागी, डॉ. वैशाली शर्मा, आकांक्षा भट्ट, हिमांशु जखमोला, ऐश्वर्य गौरव, डॉ. विनोद जोशी, इशिका, डॉ. राजन हांडा और स्माइल गोयल सहित विधि विभाग के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे ।

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