
देहरादून, 25 अगस्त। आजाद हिंद फौज के वीर सैनिक शहीद मेजर दुर्गा मल्ल की 82वीं पुण्यतिथि पर मंगलवार को शहीद मेजर दुर्गा मल्ल पार्क, गढ़ी कैंट में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। उत्तराखंड राज्य नेपाली भाषा समिति के तत्वावधान में हुए कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक संगठनों और गोर्खाली समुदाय के प्रतिनिधियों ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
मुख्य अतिथि राज्यमंत्री ज्योति कोटिया और विशिष्ट अतिथि राज्यमंत्री कैप्टन शमशेर सिंह बिष्ट सहित गोर्खाली सुधार सभा के अध्यक्ष पदम सिंह थापा, नेपाली भाषा समिति के अध्यक्ष मधुसूदन शर्मा, इंजीनियर मेग बहादुर थापा, राजेंद्र मल्ल, शैलेंद्र मल्ल, पार्षद सोमेंद्र बोहरा और पूर्व डीएफओ इंद्रेश उपाध्याय समेत अन्य लोगों ने शहीद मेजर दुर्गा मल्ल को नमन किया। इस दौरान दीप प्रज्ज्वलित कर देश की स्वतंत्रता के लिए उनके बलिदान को याद किया गया।
कार्यक्रम से पहले सुबह 6:30 बजे गांधी पार्क से शहीद दुर्गा मल्ल पार्क, गढ़ी कैंट तक साइकिल रैली निकाली गई। रैली के माध्यम से युवाओं और आम लोगों को मेजर दुर्गा मल्ल के जीवन और देश के स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान से अवगत कराया गया।
मेजर दुर्गा मल्ल का जन्म एक जुलाई 1913 को डोईवाला के निकट हुआ था। वर्ष 1931 में 18 वर्ष की उम्र में वे 2/1 गोरखा राइफल्स में भर्ती हुए। बाद में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व वाली आजाद हिंद फौज में शामिल हुए और उन्हें मेजर की जिम्मेदारी दी गई। आजाद हिंद फौज की गुप्तचर शाखा में कार्य करते हुए मार्च 1944 में उन्हें अंग्रेजी सेना ने मणिपुर के उखरूल क्षेत्र में गिरफ्तार कर लिया। अंग्रेजी हुकूमत की ओर से माफी मांगने का दबाव बनाए जाने के बावजूद उन्होंने झुकने से इनकार कर दिया। 25 अगस्त 1944 को उन्हें फांसी दे दी गई।
समारोह में कौसेली सांगितिक ग्रुप और संगीत प्रेमी परिवार के कलाकारों ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए। संकल्प पंथ ने कविता पाठ किया, जबकि महेश भूषाल ने मेजर दुर्गा मल्ल के जीवन और बलिदान पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर नायब सुबेदार दुर्गा बहादुर थापा और भाषा आंदोलन सेनानी राकेश उपाध्याय को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन महासचिव श्याम राना और उपाध्यक्ष पूजा सुब्बा चंद ने किया। कार्यक्रम में पूर्व अध्यक्ष बालकृष्ण बराल, कार्यक्रम अध्यक्ष राजेंद्र मल्ल सहित बड़ी संख्या में विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और समाज के लोग मौजूद रहे।







