देहरादून, 24 अगस्त। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में आगामी परीक्षाओं और परीक्षा परिणाम घोषित करने की मांग को लेकर छात्रों के लगातार प्रदर्शन के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने निजी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेजों के प्रबंधन और प्राचार्यों को सख्त पत्र जारी किया है। कुलसचिव डॉ. शिवकुमार बरनवाल ने कॉलेज प्रबंधन से छात्रों को विश्वविद्यालय परिसर से वापस बुलाने और किसी भी तरह की अप्रिय गतिविधि से दूर रहने के निर्देश दिए हैं।
विश्वविद्यालय की ओर से शिवालिक इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद एंड रिसर्च, क्वाड्रा इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद, मदरहुड आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, ओम आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, श्रीमती मंजीरा देवी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, हरिद्वार आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, अरोमा आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, कोर आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, सूरजमल आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, देवभूमि आयुर्वेदिक कॉलेज और दून आयुर्वेदिक कॉलेज समेत संबंधित संस्थानों को पत्र भेजा गया है।
पत्र में कहा गया है कि शैक्षणिक सत्र 2018 से 2023 के दौरान कुछ छात्रों को काउंसलिंग से इतर संस्थानों के स्तर से तथा नीट/नॉन-नीट आधार पर प्रवेश दिए जाने का मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। विश्वविद्यालय के अनुसार, इन प्रवेशों से संबंधित मामला संबंधित संस्थानों की ओर से ही उच्च न्यायालय में दायर किया गया है और अभी उस पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण विश्वविद्यालय स्तर पर आगामी परीक्षाओं और परीक्षा परिणामों को लेकर कोई अंतिम निर्णय लेना संभव नहीं है। इसके बावजूद छात्र आए दिन विश्वविद्यालय में हंगामा कर रहे हैं, प्रशासनिक भवन में तालाबंदी कर रहे हैं और परिसर में स्थित पानी की टंकी पर चढ़कर आत्मदाह की धमकी दे रहे हैं।पत्र के मुताबिक 24 अगस्त को भी छात्रों ने विश्वविद्यालय पहुंचकर हंगामा किया और पानी की टंकी पर चढ़कर आत्मदाह की धमकी दी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि इस तरह की गतिविधियों से शासकीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं।कुलसचिव ने संबंधित कॉलेजों के प्रबंधन और प्राचार्यों से तत्काल छात्रों से संपर्क कर उन्हें ऐसी गतिविधियों से दूर रहने तथा विश्वविद्यालय परिसर से वापस अपने संस्थानों में लौटने के निर्देश देने को कहा है। पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि विश्वविद्यालय परिसर में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना होने पर संबंधित संस्थान के प्रबंधन और प्राचार्य की जिम्मेदारी तय की जाएगी।








