यूपीसीएल की परियोजनाओं की मैराथन समीक्षा

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

देहरादून, 9 अगस्त। उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) के प्रबंध निदेशक पीसी ध्यानी ने रविवार को केंद्र पोषित आरडीएसएस योजना के तहत संचालित विभिन्न परियोजनाओं की मैराथन समीक्षा की। बैठक में आईटी/ओटी, स्काडा, ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर क्षेत्र में विद्युत लाइनों के भूमिगतकरण, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की सीमा चौकियों और वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत सीमांत गांवों के विद्युतीकरण समेत सभी 14 विद्युत वितरण मंडलों में चल रहे प्रणाली सुदृढ़ीकरण कार्यों की प्रगति पर चर्चा हुई।

आईटी/ओटी बिलिंग परियोजना की समीक्षा के दौरान ध्यानी ने सॉफ्टवेयर मॉड्यूल को यूजर फ्रेंडली बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मॉड्यूल तैयार करने में क्षेत्रीय कर्मचारियों और अधिकारियों के सुझाव लिए जाएं तथा फील्ड यूजर्स को प्राथमिकता के आधार पर प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने यूपीसीएल की अपनी टीम तैयार करने और परियोजना को निर्धारित समय में पूरा करने के लिए हर स्तर पर प्रयास सुनिश्चित करने को कहा।

ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर में विद्युत लाइनों के भूमिगतकरण के सभी सात पैकेजों की भी समीक्षा की गई। प्रबंध निदेशक ने सभी कार्यदायी संस्थाओं को निर्देश दिए कि आगामी कुंभ को देखते हुए नवंबर 2026 तक कार्य हर हाल में पूरा किया जाए। उन्होंने जीटीपी अनुमोदन, सामग्री निरीक्षण और डीआई समेत सभी विभागीय प्रक्रियाएं मिशन मोड में समय पर पूरी करने के निर्देश दिए।

ऋषिकेश, हरिद्वार और देहरादून में चल रही स्काडा परियोजना की समीक्षा के दौरान लंबित कार्यों पर नाराजगी जताते हुए ध्यानी ने कार्यदायी संस्था को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लापरवाही जारी रहने पर संबंधित फर्म को नोटिस जारी किया जाए। फैक्ट्री इंस्पेक्शन टेस्ट से जुड़े दस्तावेज और फैक्ट्री निरीक्षण अगस्त में पूरा करने के निर्देश दिए गए। स्काडा परियोजना को अक्टूबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।
लॉस रिडक्शन कार्यों की वर्तमान भौतिक प्रगति करीब 63 प्रतिशत है। समीक्षा के दौरान इसे सितंबर 2026 तक 100 प्रतिशत करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। कार्यदायी संस्थाओं को पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराने और काम में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। अधिशासी अभियंताओं को भी संस्थाओं के साथ समन्वय कर निर्धारित समय में कार्य पूरा कराने को कहा गया।
प्रबंध निदेशक ने सभी अधीक्षण अभियंताओं को नियमित रूप से परियोजनाओं की समीक्षा करने और कार्यदायी संस्थाओं को आवश्यक सहयोग देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में कारपोरेशन को अनुदान की धनराशि का नुकसान नहीं होना चाहिए। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की सीमा चौकियों तथा वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत सीमांत गांवों के विद्युतीकरण से जुड़े कार्यों की समीक्षा की जा रही है।

Leave a Comment

और पढ़ें