उत्तराखंड में दलितों की जमीनों पर कब्जे के मामलों की SIT जांच की मांग

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देहरादून, 5 अगस्त। राष्ट्रीय सामाजिक न्याय कृति मंच (रजि.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नानक चंद ने आरोप लगाया है कि उत्तराखंड में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों की भूमि पर अवैध कब्जे, फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन हड़पने और प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई न होने के कारण पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। संगठन ने इन मामलों की विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने की मांग की है।

उत्तरांचल प्रेस क्नालब में आयोजित प्रेस वार्ता में नानक चंद ने कहा कि आजादी के बाद से केंद्र और राज्य सरकारों ने भूमिहीन एससी-एसटी परिवारों को भूमि का मालिकाना हक देने के लिए कई योजनाएं और कानून बनाए, लेकिन भू-माफियाओं और प्रशासनिक मिलीभगत के कारण उनका पूरा लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच सका।
उन्होंने मसूरी के बांसागाड़, भट्टा क्यारकुली, हाथीपांव, देहरादून के क्लेमेन्टाउन और विकासनगर तथा हरिद्वार के रहमतपुर सहित कई क्षेत्रों के मामलों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि दलित परिवारों की जमीनों पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कब्जे किए गए हैं। कई मामलों में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, अनुसूचित जाति आयोग और जिला प्रशासन के आदेशों के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।
संगठन ने टिंकू कन्नौजिया, थेचकूमल, जोकला देवी, तारा देवी और विशाल समेत कई पीड़ित परिवारों के मामलों को उठाते हुए उनकी सुरक्षा, निष्पक्ष जांच और कब्जाई गई जमीन वापस दिलाने की मांग की।
नानक चंद ने कहा कि 15 जुलाई 2026 को मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में भी राज्यभर में दलितों की भूमि संबंधी मामलों की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई थी। उनका आरोप है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के नोटिस के बाद भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
संगठन ने राज्य सरकार से मांग की कि दलितों की भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करने, दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और भू-माफियाओं के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।

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