टिहरी झील को ग्लोबल टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनाने की तैयारी तेज

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देहरादून 9 जुलाई। उत्तराखंड की टिहरी झील को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। शुक्रवार को मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में आयोजित उच्च स्तरीय समिति की बैठक में परियोजना को ग्रीन एनर्जी आधारित बनाने, पारंपरिक गांव विकसित करने और स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि टिहरी लेक परियोजना में अधिकतम नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग किया जाए। उन्होंने एसटीपी को भी सौर ऊर्जा से संचालित करने की संभावनाएं तलाशने को कहा। साथ ही परियोजना को ऐसा आकर्षक और सरल नाम देने के निर्देश दिए जो लोगों की जुबान पर आसानी से चढ़ सके।
बैठक में टिहरी झील के आसपास के गांवों को उत्तराखंड की कला, संस्कृति और विरासत से जोड़ते हुए ‘ट्रेडिशनल विलेज’ के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया। इन मॉडल गांवों को स्थानीय आजीविका से जोड़ने और स्थानीय हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
मुख्य सचिव ने परियोजना के तहत बनने वाली सभी परिसंपत्तियों के संचालन और रखरखाव की स्थायी व्यवस्था करने तथा आय सृजन गतिविधियों को योजना का हिस्सा बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने टिहरी झील में बोटिंग और जेटी संचालन के लिए वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर झील की क्षमता का आकलन कर चरणबद्ध लेकिन समग्र कार्ययोजना तैयार करने को कहा।बैठक में प्रस्तावित संग्रहालय की थीम को टिहरी के ऐतिहासिक महत्व के अनुरूप तैयार करने के निर्देश भी दिए गए। इसमें पुरानी टिहरी के राजशाही इतिहास, लोककला, लोकसंस्कृति और पुरानी टिहरी का 3डी मॉडल शामिल करने का सुझाव दिया गया।मुख्य सचिव ने भविष्य की बैठकों में टीएचडीसी के प्रबंध निदेशक को विशेष आमंत्रित सदस्य और जिलाधिकारी टिहरी को भी शामिल करने के निर्देश दिए। बैठक में प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. वी. षणमुगम, धीराज सिंह गर्ब्याल समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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