नई दिल्ली, 17 अप्रैल 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सितंबर 2023 में संसद में प्रस्तुत नारी शक्ति वंदन अधिनियम के जरिए महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के साथ-साथ अब आर्थिक क्षेत्र में भी उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। विशेष रूप से एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 की शुरुआत तक उद्यम पंजीकरण पोर्टल और उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म पर 3.11 करोड़ से अधिक महिला-नेतृत्व वाले उद्यम पंजीकृत हो चुके हैं, जो देश के कुल पंजीकृत एमएसएमई का लगभग 40 प्रतिशत हैं। यह न केवल महिला उद्यमिता के विस्तार को दर्शाता है, बल्कि रोजगार सृजन में भी उनकी अहम भूमिका को रेखांकित करता है।
सरकार द्वारा पंजीकरण प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन, पेपरलेस और स्व-घोषणा आधारित बनाए जाने से महिलाओं के लिए व्यवसाय शुरू करना आसान हुआ है। जनवरी 2023 में शुरू किए गए उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म ने विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र की उन महिलाओं को मुख्यधारा में लाने का काम किया है, जिनके पास पहले पैन या जीएसटी नंबर नहीं था।एमएसएमई मंत्रालय ने महिलाओं के लिए बहुआयामी नीति ढांचा तैयार किया है, जिसमें वित्तीय सहायता, तकनीकी पहुंच, डिजिटलीकरण, बाजार उपलब्धता और कौशल विकास जैसे आठ प्रमुख क्षेत्रों पर काम किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत पिछले पांच वर्षों में 3.2 लाख से अधिक महिला उद्यमों को समर्थन मिला है, जबकि कुल लाभार्थियों में महिलाओं की हिस्सेदारी 39 प्रतिशत है। वहीं, क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (CGTMSE) के तहत महिला उद्यमियों को 90 प्रतिशत तक गारंटी कवर दिया जा रहा है, जिससे बिना गारंटी के ऋण प्राप्त करना आसान हुआ है।
सरकारी खरीद नीति में संशोधन कर यह अनिवार्य किया गया है कि केंद्रीय मंत्रालय, विभाग और सार्वजनिक उपक्रम अपनी वार्षिक खरीद का कम से कम 3 प्रतिशत महिला-स्वामित्व वाले एमएसएमई से करें। वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 3.5 प्रतिशत तक पहुंच गया है।इसके अलावा जीरो डिफेक्ट जीरो इफेक्ट (ZED) योजना के तहत महिला उद्यमों को प्रमाणन शुल्क पर 100 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। महिला कोयर योजना, एमएसएमई-टीईएएम (ट्रेड एनेबलमेंट एंड मार्केटिंग) और यशस्विनी अभियान जैसी योजनाएं भी महिलाओं को कौशल, विपणन और जागरूकता के स्तर पर सशक्त बना रही हैं।एमएसएमई मंत्रालय का वूमेन एंटरप्रेन्योरशिप सेल (WEC) विभिन्न योजनाओं के समन्वय और निगरानी का कार्य कर रहा है, ताकि महिलाओं को लक्षित लाभ सुनिश्चित हो सके।विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहलें केवल योजनाएं नहीं बल्कि एक व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं, जिसमें महिलाओं को आर्थिक विकास की मुख्यधारा में लाने का लक्ष्य है। स्वयं सहायता समूहों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं में आत्मविश्वास और उद्यमिता की भावना को भी बढ़ावा मिल रहा है।
सरकार का मानना है कि ‘नारी शक्ति’ केवल सामाजिक सशक्तिकरण का विषय नहीं, बल्कि देश की आर्थिक प्रगति का आधार है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में महिला उद्यमियों की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है।






