गीता केवल धर्मग्रंथ नहीं, जीवन का व्यावहारिक दर्शन: कर्नल आर. डी. नौटियाल

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देहरादून 11 मार्च।सुभाष नगर स्थित श्री सत्य साईं मंदिर में “भगवत गीता: एक परिचय” विषय पर एक आध्यात्मिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर  कर्नल आर. डी. नौटियाल ने कहा कि भगवद्गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाला कालजयी दर्शन है। उन्होंने कहा कि आज के तनावपूर्ण और प्रतिस्पर्धात्मक युग में गीता के सिद्धांत व्यक्ति को मानसिक संतुलन, आत्मविश्वास और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करते हैं।।

उन्होंने श्रीमद्भागवत और भगवद्गीता के बीच के मूलभूत अंतर को सरल भाषा में समझाते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत मुख्य रूप से भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, भक्ति और उनके दिव्य चरित्र का वर्णन करता है, जबकि भगवद्गीता जीवन के संघर्षों के बीच कर्तव्य, धर्म और आत्मज्ञान का मार्ग दिखाने वाला दिव्य उपदेश है, जो भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि में अर्जुन को दिया था।

कर्नल नौटियाल ने गीता के मूल संदेश को स्पष्ट करते हुए कहा कि मनुष्य को अपने कर्तव्यों का पालन निस्वार्थ भाव से करना चाहिए और फल की चिंता किए बिना कर्म करते रहना चाहिए। उन्होंने गीता में वर्णित तीन प्रमुख मार्गों—कर्मयोग, भक्ति योग और ज्ञान योग—का विस्तार से उल्लेख करते हुए बताया कि कर्मयोग कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी का मार्ग सिखाता है, भक्ति योग ईश्वर के प्रति समर्पण और आस्था को मजबूत करता है, जबकि ज्ञान योग आत्मबोध, विवेक और सत्य की अनुभूति की ओर ले जाता है।

उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति इन सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाता है तो उसके भीतर सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। इससे व्यक्ति अपने व्यक्तिगत जीवन में शांति, संतुलन और संतोष प्राप्त करता है तथा समाज में भी सद्भाव, सेवा और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा मिलता है।

कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने इस प्रकार के ज्ञानवर्धक और आध्यात्मिक कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि आज के समय में ऐसे प्रवचन समाज को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने भविष्य में भी इस प्रकार की गोष्ठियों और व्याख्यानों के नियमित आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम का संचालन बीना जोशी ने दो किया। इस अवसर पर श्री सत्य साईं सेवा संगठन उत्तराखंड के प्रांतीय उपाध्यक्ष अजय स्वरूप ने कहा कि कर्नल आर. डी. नौटियाल ने अपने संक्षिप्त किंतु सारगर्भित व्याख्यान के माध्यम से वास्तव में “गागर में सागर भरने” का कार्य किया है।इस अवसर पर अध्यक्ष नरेश धीर, राधा वल्लभ, सोनिया धीर, चांद बल्लभ, पांडुरंग, कर्नल पटवाल, सहगल, मदन गबराल, कपिल सहित बड़ी संख्या में मातृशक्ति और संगठन के सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से मंगल आरती में भाग लिया और भक्ति एवं श्रद्धा के वातावरण में कार्यक्रम का समापन हुआ।

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