खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर’ के साथ दून पुस्तकालय में गूंजी होली की स्वर लहरियां

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देहरादून, 2 मार्च । दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के एम्फीथियेटर में सोमवार को संगीतांजली शास्त्रीय संगीत समिति की ओर से होली मिलन समारोह का भव्य आयोजन किया गया। रंग, संगीत और लोकधुनों से सजे इस कार्यक्रम ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में आकाशवाणी के टॉप ग्रेड सितार वादक पंडित रॉबिन कर्माकर के नेतृत्व में ग्रेडेड कलाकारों ने होली गीतों और नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। कलाकारों ने गढ़वाली, कुमाऊनी, रूहेलखंडी, ब्रज और राजस्थानी होली गीतों की प्रस्तुति देकर वातावरण को पूर्णतः रंगमय बना दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ “जय बोलो गिरिजा नन्दन की” लोकगीत से हुआ। इसके बाद “हर फूलों से मथुरा छाई रही”, “आओ बृजराज खेले होली”, “खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर”, “खोल दे माता खोल भवानी”, “मेरो रंगीलो देवर घर ऐ रो छो”, “मन मोहन नन्दकिशोर”, “झनकारो झनकारो” और “होलिया में उड़े रे गुलाल” जैसे लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति पर श्रोता झूम उठे।
इस अवसर पर रेखा उनियाल, पुष्पा रावत, शिवानी कर्माकर, रेखा रावत, अमृता हालदार, सीमा बिष्ट, नीलम नेगी, लक्ष्मी मंडल, सुनीता बहुगुणा, सरिता कुलाश्री, विजया शर्मा, मीनू नेगी एवं योगिता पांथरी ने अपनी सुरमयी प्रस्तुतियों से समां बांधा। संगत में सैकत मंडल, संचारी पुरकायस्थ, आयुष्मान और प्रदीप शर्मा ने संगीत की मधुरता को और निखारा। मंच संचालन शांति बिंजोला और रक्षा बौड़ाई ने किया।
कार्यक्रम में सामाजिक इतिहासकार डॉ. योगेश धस्माना ने उत्तराखण्ड की होली के सामाजिक-ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पर्वतीय होली सामाजिक समरसता और भाईचारे की परंपरा को सदियों से मजबूत करती आई है।
इस अवसर पर शोध केन्द्र के कार्यक्रम अधिकारी चन्द्रशेखर तिवारी, पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. डी.एम. पाण्डे, जे.बी. गोयल, डॉ. लालता प्रसाद सहित संगीतांजली संस्था के पदाधिकारी और शहर के अनेक गणमान्य व्यक्ति तथा युवा पाठक उपस्थित रहे ।

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