देहरादून 7 दिसंबर।
उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPCL) ने बिजली दरों को लेकर हाल में प्रकाशित कुछ समाचारों को भ्रामक बताते हुए स्पष्ट कहा है कि उपभोक्ताओं में फैलाए जा रहे भ्रम का वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। निगम ने कहा कि न तो UPCL स्वयं बिजली दर बढ़ाता है और न ही दरों में वृद्धि का निर्णय उसके अधिकार क्षेत्र में आता है। राज्य में बिजली दरों का निर्धारण केवल उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) द्वारा एक पारदर्शी प्रक्रिया, विस्तृत विश्लेषण और जनसुनवाई के बाद ही किया जाता है।
UPCL का कहना है कि मीडिया के एक वर्ग में विद्युत दरों में 16% वृद्धि का जो उल्लेख किया गया है, वह नियमित वार्षिक टैरिफ़ वृद्धि नहीं, बल्कि पूर्व वित्तीय वर्षों के True-up समायोजन से जुड़ी एक तकनीकी गणना है। वर्ष 2024–25 में आयोग द्वारा अनुमानीत ARR और वास्तविक ARR के बीच अंतर बढ़ने के कारण लगभग 13.59% समायोजन की आवश्यकता उत्पन्न हुई। यह एक लेखा आधारित प्रक्रिया है, न कि उपभोक्ताओं पर लागू किए जाने वाली नई दर वृद्धि।
UPCL ने कहा कि यदि निगम को उसके वैधानिक दावे समय पर मिल जाते, तो यह अंतर उत्पन्न ही नहीं होता।
निगम द्वारा वर्ष 2026–27 के लिए केवल 2.64% सामान्य टैरिफ़ वृद्धि का ही प्रस्ताव रखा गया है, जो उपभोक्ता हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह वास्तविक वृद्धि का प्रस्ताव है, जबकि 16% केवल तकनीकी हिसाब-किताब का हिस्सा है।
UPCL ने बताया कि टैरिफ़ प्रस्ताव 10 दिसंबर 2025 तक नियामक आयोग के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके बाद आयोग—
• सभी हितधारकों से आपत्तियाँ और सुझाव आमंत्रित करेगा,
• प्रदेशभर में जनसुनवाई आयोजित करेगा,
• वित्तीय तथ्यों और तकनीकी विवरणों का परीक्षण करेगा,
• और उपभोक्ता हितों को सर्वोपरि रखते हुए अंतिम टैरिफ़ आदेश जारी करेगा।
निगम ने यह भी कहा कि आयोग द्वारा पिछले वर्षों में सदैव उपभोक्ता हितों को प्राथमिकता दी गई है। उदाहरणस्वरूप—
वर्ष 2025–26 में UPCL ने 12.01% वृद्धि का प्रस्ताव रखा, पर आयोग ने केवल 5.62% वृद्धि मंज़ूर की।
वर्ष 2024–25 में 27.06% वृद्धि के प्रस्ताव पर आयोग ने सिर्फ 7.66% वृद्धि स्वीकृत की।
इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि आयोग प्रत्येक प्रस्ताव पर संतुलित और उपभोक्ता हितैषी निर्णय लेता है।
UPCL ने कहा कि प्रदेश में विद्युत आपूर्ति को अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए निगम निरंतर बड़े पैमाने पर कार्य कर रहा है—उपकेंद्रों का निर्माण, ट्रांसफॉर्मर क्षमता वृद्धि, लाइनों का उन्नयन, भूमिगत केबलिंग, स्मार्ट मीटरिंग, डिजिटल बिलिंग, फॉल्ट प्रबंधन प्रणाली आदि के माध्यम से उपभोक्ताओं को तेज, पारदर्शी और भरोसेमंद सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन सुधारों के कारण बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और विश्वसनीयता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
UPCL ने उपभोक्ताओं से अपील की कि निगम का उद्देश्य किसी भी रूप में आर्थिक बोझ बढ़ाना नहीं है। उद्योगों, व्यापारियों, किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं को किफायती और गुणवत्तापूर्ण विद्युत सेवाएँ उपलब्ध कराना ही निगम की सर्वोच्च प्राथमिकता है। टैरिफ़ से संबंधित अंतिम निर्णय केवल UERC द्वारा उपभोक्ता हितों को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा।







