विशेष कार्ययोजना और अधिक मुआवजा सहायता की मांग, 25 वर्षों में 1264 मौतों के आंकड़े रखे
देहरादून, 5 दिसंबर।
उत्तराखंड में बढ़ते मानव–वन्यजीव संघर्ष को बेहद गंभीर मुद्दा बताते हुए भाजपा प्रदेशाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने उच्च सदन में केंद्र सरकार का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण के बाद से वन्यजीव हमलों की घटनाएँ चिंताजनक रूप से बढ़ी हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों की जान जा रही है और कई लोग गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं। इसी स्थिति को सामने रखते हुए उन्होंने केंद्र से विशेष कार्ययोजना बनाने और मृतकों एवं घायलों के लिए अधिक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की।
सांसद भट्ट ने सदन में प्रस्तुत आँकड़ों के अनुसार बताया कि पिछले 25 वर्षों में वन्यजीव हमलों में 1264 लोगों की मौत और 6519 लोगों के घायल होने की घटनाएँ दर्ज की गई हैं। इनमें सबसे अधिक गुलदार के हमलों ने 546 लोगों की जान ली, जबकि 2126 लोग घायल हुए। इसी तरह हाथी के हमलों में 230 मौतें और 234 घायल, बाघ के हमलों में 106 मौतें और 134 घायल, भालू के हमलों में 71 मौतें और 2012 घायल, साँप के काटने से 360 मौतें और 1056 घायल तथा मगरमच्छ के हमलों में 69 मौतें और 44 लोग घायल हुए हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान वर्ष में ही अब तक 24 लोग वन्यजीव हमलों में अपनी जान गंवा चुके हैं, जिनमें भालू के हमलों में 5 और बाघ–गुलदार के हमलों में 19 लोग शामिल हैं, जबकि 130 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उन्होंने हाल ही में पौड़ी, चमोली, टिहरी, उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग जिलों में घटी दुखद घटनाओं का उल्लेख कर चिंता व्यक्त की।
भट्ट ने कहा कि उत्तराखंड सहित हिमालयी राज्यों में वन क्षेत्र का प्रतिशत अधिक है और बड़ी संख्या में लोग आज भी जंगलों पर निर्भर हैं, जिसके कारण मानव–वन्यजीव संघर्ष की समस्या यहाँ और जटिल हो जाती है। उन्होंने आग्रह किया कि केंद्र सरकार इस समस्या की गंभीरता को देखते हुए एक व्यापक और विशेष कार्ययोजना तैयार करे, जिसमें जंगली जानवरों की बढ़ती दहशत को रोकने से लेकर पीड़ितों के पुनर्वास तक के ठोस उपाय शामिल हों।
सांसद महेंद्र भट्ट ने मृतकों के आश्रितों को अधिक मुआवजे, घायलों के सम्पूर्ण सरकारी उपचार और राहत–पुनर्वास संबंधी एक सुदृढ़ नीति बनने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया, ताकि पीड़ित परिवारों को वास्तविक सहायता मिल सके।









