हरिद्वार में अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन में शामिल हुए मुख्यमंत्री धामी

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देहरादून 1 नवम्बर । हरिद्वार में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन में मंगलवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भाग लिया। सम्मेलन में पहुंचे देश-विदेश के विद्वानों ने “भारतीय ज्ञान परंपरा और वैश्विक ज्ञान के विकास में संस्कृत का योगदान” विषय पर विचार रखे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने राज्य में संस्कृत के समग्र उत्थान और प्रसार के लिए एक उच्च स्तरीय आयोग बनाने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह सम्मेलन भारतीय सभ्यता की गौरवशाली जड़ों को विश्व मंच पर नई पहचान दिलाने वाला है। उन्होंने बताया कि उनके लिए संस्कृत प्रारंभ से ही प्रेरणा का विषय रही है और विद्यालयी शिक्षा के दौरान संस्कृत अध्ययन के अनुभव आज भी स्मरण हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा, विज्ञान, दर्शन और समग्र ज्ञान-संपदा का मूल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व की अनेक भाषाओं की जड़ें संस्कृत में मिलती हैं। वेद, उपनिषद, पुराण, आयुर्वेद, योग, साहित्य, गणित और खगोल विद्या जैसे सभी प्राचीन ग्रंथ संस्कृत में लिखे गए, जिन्होंने भारत को वैचारिक रूप से समृद्ध बनाया। उन्होंने तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालयों का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्व स्तर पर ज्ञान के प्रसार में संस्कृत की देववाणी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए कई पहलें शुरू की गई हैं। नई शिक्षा नीति में संस्कृत को व्यवहारिक और आधुनिक भाषा के रूप में सशक्त करने पर विशेष बल दिया गया है। ई-संस्कृत शिक्षण प्लेटफॉर्म, मोबाइल एप्स और ऑनलाइन सामग्री उपलब्ध होने से संस्कृत अब युवा पीढ़ी के लिए अधिक सुलभ हो रही है। उन्होंने लोकसभा कार्यवाही के संस्कृत अनुवाद को भी एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

उत्तराखंड में संस्कृत को दूसरी राजभाषा का दर्जा देने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि सदियों से संस्कृत का प्रमुख केंद्र रही है और राज्य सरकार इस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा गार्गी संस्कृत बालिका छात्रवृत्ति योजना, डॉ. भीमराव अंबेडकर एससी/एसटी छात्रवृत्ति योजना, संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान योजना सहित कई प्रोत्साहन योजनाएँ संचालित की जा रही हैं, जिनसे विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता और प्रेरणा मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड संस्कृत अकादमी द्वारा शोध सम्मेलन, वेद सम्मेलन, ज्योतिष सम्मेलन, संस्कृत शिक्षक प्रशिक्षण और छात्र प्रतियोगिताओं जैसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं। साथ ही राज्य के सभी जिलों में आदर्श संस्कृत ग्राम स्थापित करने की दिशा में कार्य शुरू किया गया है, जिससे संस्कृत को जन-जन तक पहुँचाने की पहल और मजबूत होगी।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड की यह पावन भूमि, जिसने ऋषि-मुनियों और महान विद्वानों को जन्म दिया, वहाँ संस्कृत के उत्थान को आगे ले जाना हमारा दायित्व है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में संस्कृत केवल पूजा-पाठ की भाषा न रहकर जन-संवाद और दैनिक जीवन की भाषा के रूप में भी स्थापित होगी।

सम्मेलन में पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, विधायक आदेश चौहान, प्रदीप बत्रा, प्रदेश उपाध्यक्ष स्वामी यतीश्वरानंद, भारत सरकार की विदेश सचिव मीना मल्होत्रा, सचिव संस्कृत उत्तराखंड दीपक गैरोला, संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र शास्त्री, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र सिंह डोभाल सहित विभिन्न देशों के विद्वान, वक्ता और छात्र बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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