अभाविप अधिवेशन में पाँच प्रस्ताव पारित, छात्रावास सर्वेक्षण से लेकर ‘स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम’ तक बड़े अभियान घोषित
1211 प्रतिनिधियों की भागीदारी के साथ अभाविप का राष्ट्रीय अधिवेशन सम्पन्न, रानी अब्बक्का यात्रा और बिरसा संदेश यात्रा रहीं आकर्षण
- देहरादून 1 नवम्बर

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अधिवेशन का सांस्कृतिक और ऐतिहासिक आकर्षण तीन विशेष यात्राएँ रहीं, जिन्होंने प्रतिनिधियों में राष्ट्रभाव और सांस्कृतिक चेतना का संचार किया। कर्नाटक से 3000 किमी की दूरी तय कर पहुंची रानी अब्बक्का कलश यात्रा ने स्वतंत्रता संग्राम की वीर नायिका की स्मृति को पुनर्जीवित किया। वहीं भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में निकली भगवान बिरसा संदेश यात्रा ने भूमि, जल, जंगल संरक्षण तथा जनजातीय अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश पूरे मार्ग में युवाओं तक पहुंचाया। इसके साथ ही श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें बलिदान दिवस के अवसर पर दिल्ली के गुरुद्वारा शीशगंज साहिब से लाए गए पवित्र जल-कलश का अधिवेशन में श्रद्धापूर्वक स्वागत किया गया, जिसने समारोह को आध्यात्मिक चेतना प्रदान की।
इसी दौरान अधिवेशन में पाँच प्रस्ताव पारित किए गए, जिनमें सभी शैक्षणिक संस्थानों को एक संरचित व्यवस्था के अंतर्गत लाने तथा पर्याप्त वित्तीय आवंटन की मांग, बांग्लादेशी घुसपैठ को राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतांत्रिक ढांचे के लिए गंभीर चुनौती बताया जाना, मानवीय गतिविधियों से उत्पन्न प्राकृतिक आपदाओं के निवारण में समाज की भूमिका, विभाजनकारी ताकतों के विरुद्ध संगठित समाज की आवश्यकता जैसे विषय शामिल रहे। ‘समाज परिवर्तन का वाहक बने युवा’ विषयक प्रस्ताव 27 दिसंबर को आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद की बैठक में पारित किया गया।
अधिवेशन परिसर में स्थापित रानी अब्बक्का प्रदर्शनी ने संगठन के 77 वर्षों की यात्रा, स्वतंत्रता संग्राम, संस्कृति संरक्षण और उत्तराखंड की लोक परंपराओं की समृद्ध विरासत को आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया। प्रदर्शनी का उद्घाटन पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट के महासचिव आचार्य बालकृष्ण और उत्तराखंड सरकार के शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत ने किया। इसी दौरान अभाविप के महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने देशभर में संगठन द्वारा किए गए कार्यक्रमों, आंदोलनों और उपलब्धियों का विस्तृत महामंत्री प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, जिसमें वर्ष 2025 में अभाविप की 76,98,448 सदस्यता का आँकड़ा विशेष उल्लेखनीय रहा।
सत्र 2025–26 के लिए प्रो. (डॉ.) राजकिशोर तिवारी को राष्ट्रीय अध्यक्ष और डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी को पुनः राष्ट्रीय महामंत्री घोषित किया गया। अधिवेशन का उद्घाटन इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ ने किया। शिक्षा और तकनीक से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई, जिनमें भारतीय शिक्षा संकल्पना, वैश्विक Gen-Z आंदोलन, AI व चैटGPT का शिक्षा पर प्रभाव, बांग्लादेशी घुसपैठ और जनसंख्या असंतुलन जैसे समसामयिक मुद्दे शामिल थे।
अधिवेशन के दौरान प्रा. यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार–2025 भी प्रदान किया गया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यह सम्मान गोरखपुर के श्रीकृष्ण पांडेय ‘आजाद’ को प्रदान किया, जिन्होंने मनोरोगियों के पुनर्वास, बाल भिक्षावृत्ति उन्मूलन, नशामुक्ति, स्वच्छता व पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
अभाविप ने आगामी वर्ष में कई राष्ट्रीय अभियानों की घोषणा भी की, जिनमें देशभर में छात्रावास सर्वेक्षण, ‘वंदेमातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर राष्ट्रव्यापी वंदेमातरम गान, ‘स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम’ अभियान, महारानी अब्बक्का की 500वीं जन्मजयंती वर्ष पर विशेष आयोजन, भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर कार्यक्रम तथा आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर जागरूकता अभियान शामिल हैं।
राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि इस अधिवेशन ने संगठनात्मक कार्य को नई ऊर्जा और गति प्रदान की है। प्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों में दृढ़ संकल्प से कार्य करते हुए विद्यार्थी परिषद का संदेश पूरे समाज तक पहुंचाएंगे और आने वाले दिनों में छात्रशक्ति पूरे देश में और अधिक तीव्रता से आगे बढ़ेगी।







