चमोली 25 अक्टूबर । 

चिपको आंदोलन की प्रणेता और पर्यावरण संरक्षण की प्रतीक स्व. गौरा देवी की जन्म शताब्दी के अवसर पर शनिवार को डाक विभाग, उत्तराखंड परिमंडल की ओर से उनके सम्मान में एक विशेषीकृत “माई स्टाम्प” और विशेष आवरण (स्पेशल कवर्ड) जारी किया गया। यह कार्यक्रम रैणी गाँव, जोशीमठ में आयोजित हुआ — वही गाँव जहाँ 1974 में गौरा देवी ने महिलाओं के साथ मिलकर पेड़ों को काटने से बचाने के लिए ऐतिहासिक “चिपको आंदोलन” की शुरुआत की थी।
इस अवसर पर उत्तराखंड के वन मंत्री सुबोध उनियाल, विधायक लखपत बुटोला, गौरा देवी के सुपुत्र चंद्र सिंह राणा, मुख्य पोस्टमास्टर जनरल शशि शालिनी कुजूर, निदेशक डाक सेवाएं अनसूया प्रसाद, प्रमुख वन संरक्षक डॉ. रंजन कुमार मिश्र, नंदा देवी बायोस्फियर रिज़र्व के निदेशक पंकज कुमार, बद्रीनाथ वन प्रभाग के डीएफओ सर्वेश दुबे और कई अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
गौरतलब है कि गौरा देवी का जन्म 1925 में जोशीमठ के लाता गाँव में हुआ था। विवाह के बाद वे रैणी गाँव की निवासी बनीं। मार्च 1974 में जब ठेकेदारों द्वारा गाँव के पास के जंगलों में पेड़ों की कटाई शुरू की गई, तो गौरा देवी ने गाँव की महिलाओं के साथ मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने पेड़ों को गले लगाकर कटाई रुकवाई — इसी से चिपको आंदोलन की शुरुआत हुई।
महिलाओं की इस ऐतिहासिक पहल ने न केवल जंगल बचाए बल्कि पूरे विश्व में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक नई चेतना जगाई। गौरा देवी और उनके साथियों का यह आंदोलन आज भी हिमालयी पारिस्थितिकी और ग्रामीण आजीविका के अधिकार का प्रतीक माना जाता है।
डाक विभाग द्वारा जारी माई स्टाम्प और विशेष आवरण गौरा देवी के योगदान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करने का एक प्रयास है। यह आयोजन महिलाओं की पर्यावरणीय भागीदारी और उत्तराखंड की पर्यावरणीय विरासत को समर्पित रहा।









