सीएम धामी ने श्रमवीरों के कल्याण के लिए ₹11.50 करोड़ की आर्थिक सहायता डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की

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तीन माह में 6 लाख श्रमिकों का पंजीकरण कराने के सख्त निर्देश, खनन विभाग को बताया ‘मॉडल डिपार्टमेंट’

देहरादून 14 अक्टूबर।


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित कैंप कार्यालय में उत्तराखण्ड भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की बैठक आयोजित हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री ने डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से लगभग 10 हजार पंजीकृत निर्माण श्रमिकों और उनके आश्रितों को ₹11 करोड़ 50 लाख की आर्थिक सहायता राशि हस्तांतरित की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल धनराशि हस्तांतरण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि परिश्रमी श्रमवीरों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि श्रमिकों और उनके परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य, विवाह सहायता और मृत्यु उपरांत सहायता जैसी योजनाओं का सीधा लाभ पारदर्शी और समयबद्ध रूप से मिले।

सीएम धामी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि राज्य के सभी मनरेगा श्रमिकों को शीघ्रतापूर्वक भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के अंतर्गत पंजीकृत किया जाए। उन्होंने कहा कि अगले तीन महीनों के भीतर कम से कम 5 से 6 लाख श्रमिकों का पंजीकरण पूरा किया जाए। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता या विलंब स्वीकार्य नहीं होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रम विभाग एवं बोर्ड के अधिकारियों का यह दायित्व है कि वे प्रत्येक श्रमिक तक पहुँच बनाएं और उन्हें सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दें। उन्होंने कहा कि जानकारी के अभाव में पात्र श्रमिक योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते हैं, इसलिए योजनाओं का प्रचार-प्रसार पंचायत स्तर तक किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा—
“राज्य का विकास हमारे श्रमिक भाइयों-बहनों के परिश्रम पर आधारित है। उनके कल्याण में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी। सभी मनरेगा श्रमिकों को कल्याण बोर्ड के अंतर्गत लाना केवल लक्ष्य नहीं, यह हमारी जिम्मेदारी है।”

सीएम धामी ने कहा कि श्रमवीरों की मेहनत और समर्पण ही राज्य की प्रगति की नींव है। सरकार का संकल्प है कि हर श्रमिक परिवार को सामाजिक सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य मिले। उन्होंने कहा कि बोर्ड की सभी योजनाओं को डिजिटल माध्यम से जोड़ा जा रहा है ताकि सहायता सीधे पात्र श्रमिकों तक पहुँच सके।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वे श्रमिकों के बीच जाकर योजनाओं की जानकारी दें और लाभ प्राप्ति की प्रक्रिया में उनकी मदद करें। साथ ही श्रमिकों से भी अपील की कि वे अपने अधिकारों के प्रति सजग रहें और योजनाओं की जानकारी समय-समय पर प्राप्त करें।

सीएम ने कहा—
“मेहनत हमारी ताकत है, एकता हमारी पहचान है। राज्य सरकार हमारे परिश्रमी श्रमवीरों के हर सुख-दुःख की सहभागी है। उनका कल्याण ही हमारी सरकार का सर्वोच्च लक्ष्य है।”

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने खनन विभाग की सराहना करते हुए कहा कि विभाग ने राजस्व वृद्धि के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्होंने बताया कि राज्य के खनन राजस्व में 800 करोड़ की अप्रत्याशित वृद्धि सरकार की पारदर्शी नीति और सख्त व्यवस्था का परिणाम है।

सीएम धामी ने कहा कि पारदर्शिता, जवाबदेही और सख्त निगरानी के कारण अब खनन क्षेत्र में किसी तरह की अनियमितता की गुंजाइश नहीं बची है। यही कारण है कि हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के अधिकारी उत्तराखण्ड की खनन नीति का अध्ययन करने यहां पहुंचे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खनन विभाग उत्तराखण्ड का ‘मॉडल डिपार्टमेंट’ बन चुका है। अन्य विभागों को भी खनन विभाग की पारदर्शी कार्यप्रणाली और अनुशासन से सीख लेनी चाहिए ताकि योजनाओं का लाभ जनता तक समय पर पहुँच सके और राज्य का राजस्व लगातार बढ़ता रहे।

बैठक में सचिव श्रीधर बाबू अदाकी, अपर सचिव विनीत कुमार सहित श्रम विभाग एवं भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के अधिकारी उपस्थित रहे।

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