आरटीआई की 20वीं वर्षगांठ पर कांग्रेस ने साधा निशाना, करन माहरा बोले—“आरटीआई की कमजोरी, लोकतंत्र की कमजोरी”

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देहरादून, 12 अक्टूबर।
उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष करन माहरा ने सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम की 20वीं वर्षगांठ पर कहा कि कांग्रेस का संकल्प पारदर्शिता और जवाबदेही की रक्षा के लिए हमेशा अटल रहा है। उन्होंने कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व और सोनिया गांधी के मार्गदर्शन में 12 अक्टूबर 2005 को लागू हुआ यह कानून आम नागरिक को सशक्त बनाने वाला ऐतिहासिक कदम था।

माहरा ने आरोप लगाया कि 2014 के बाद मोदी सरकार ने लगातार आरटीआई कानून को कमजोर किया, जिससे लोकतांत्रिक पारदर्शिता पर गंभीर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि 2019 के संशोधन से सूचना आयोगों की स्वायत्तता खत्म हुई और 2023 के डेटा प्रोटेक्शन कानून ने “व्यक्तिगत जानकारी” के दायरे को इतना बढ़ा दिया कि जनहित से जुड़ी सूचनाएँ भी अब छिपाई जा सकती हैं।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय और राज्य सूचना आयोगों में रिक्तियाँ बढ़ रही हैं और लाखों मामले लंबित हैं, जिससे नागरिकों का भरोसा कमजोर हो रहा है।

कांग्रेस ने मांग की है कि 2019 के संशोधन रद्द किए जाएँ, DPDP अधिनियम की धारा 44(3) की समीक्षा हो, आयोगों में सभी पद पारदर्शी तरीके से भरे जाएँ और व्हिसलब्लोअर प्रोटेक्शन एक्ट को लागू किया जाए।

माहरा ने कहा, “आरटीआई की कमजोरी, लोकतंत्र की कमजोरी है। कांग्रेस इस कानून की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।”

इस अवसर पर अमरजीत सिंह, सुजाता पॉल, शीशपाल सिंह बिष्ट, जसविंदर सिंह जोगी और नवीन जोशी मौजूद रहे।

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