
देहरादून 28 फरवरी।
सात फरवरी को निधि राठौर पुत्री श्री श्याम लाल निवासी पीठावाला, चंद्रमणी पटेलनगर देहरादून थाना कोतवाली पटेलनगर पर गुमशुदगी अंकित करायी कि उनके पिताजी श्याम लाल गुरुजी अपनी स्प्लेंडर मोटरसाइकिल संख्या: यू0के0-07-डीटी-1685 से बिना बताए घर से कहीं निकल गये थे, जिन्हे उनके द्वारा अपने सभी रिश्तेदारो के यहाँ व संभावित स्थानों पर तलाश किया गया, पर उनके संबंध में कोई जानकारी नहीं मिल पाई। बुजुर्ग व्यक्ति की गुमशुदगी की घटना की गम्भीरता के दृष्टिगत पुलिस द्वारा तत्काल गुमशुदगी को अपहरण में तरमीम करते हुए थाना पटेलनगर पर धारा 140 भा0न्या0सं0 का अभियोग पंजीकृत कर विवेचना प्रारम्भ की गई।
एसएसपी देहरादून द्वारा गुमशुदा की तलाश हेतु पुलिस टीम गठित कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए। गठित टीम द्वारा गुमशुदा श्यामलाल की तलाश हेतु उनके घर व आस पास के मार्गाे की सीसीटीवी फुटेजों का अवलोकन किया गया, तो गुमशुदा श्यामलाल का घर से निकलकर अपनी मोटरसाइकिल से किशन नगर चौक होते हुए एक महिला गीता के घर के पास तक जाना प्रकाश में आया । लेकिन गुमशुदा श्यामलाल गुरु जी के वापस आने की कोई भी फुटेज पुलिस को प्राप्त नही हुयी । जिस पर पुलिस टीम द्वारा उक्त सन्दिग्ध महिला गीता व उसके पति के सम्बंध में जानकारी की गई तो उक्त दोनों का अपने घर से फरार होना तथा दोनो के मोबाइल नंबरो का बंद होना पाया गया। सर्विलांस के माध्यम से जानकारी में कुछ अन्य सन्दिग्ध नम्बर प्रकाश मे आये, जिनसे दोनो संदिग्ध व्यक्तियो द्वारा श्याम लाल की गुमशुदगी के बाद संपर्क किया गया था। प्राप्त जानकारी के आधार पर पुलिस टीम द्वारा संदिग्ध महिला गीता के मायके देवबंद सहारनपुर दबिश देते हुये उसके भाई अजय कुमार पुत्र रामपाल को पूछताछ हेतु हिरासत में लिया गया, जिससे पूछताछ में उसने गीता तथा उसके पति हिमांशु चौधरी द्वारा गुमशुदा श्याम लाल की हत्या करने तथा उसके द्वारा अपने बहनोई धनराज चावला पुत्र संजय चावला निवासी कैलाशपुर कॉलोनी थाना देवबंद सहारनपुर के साथ शव को ठिकाने लगाने की बात बताई गई, जिस पर पुलिस टीम द्वारा घटना में प्रकाश में आये अभियुक्त धनराज चावला को देवबंद सहारनपुर से गिरफ्तार किया गया। जिनसे पूछताछ में बताया कि दो फरवरी को गीता द्वारा अपने पति हिमांशु चौधरी के साथ मिलकर गुमशुदा श्यामलाल की हत्या करना तथा अभियुक्तो द्वारा उसके शव को देवबंद स्थित साखन की नहर में फेकने की जानकारी दी गयी।
पुलिस द्वारा 20 फरवरी को मृतक श्यामलाल के शव को सहारनपुर के बडगांव थाना क्षेत्र से बरामद किया गया था। घटना के बाद से ही मुख्य आरोपी गीता तथा हिमांशु लगातार फरार चल रहे थे । जिनकी गिरफ्तारी हेतु पुलिस टीम द्वारा लगातार गैर प्रान्त राजस्थान, जयपुर, कोटा, दिल्ली आदि स्थानों पर दबिशें दी गयी पर अभियुक्त अपनी गिरफ्तारी से बचते हुए लगातार अपनी मौजूदगी को छिपा रहे थे। अभियुक्तों के लगातार फरार चलने पर उनकी गिरफ्तारी हेतु एसएसपी देहरादून द्वारा दोनो दम्पति अभियुक्तों पर 25-25 हजार रूपए का ईनाम घोषित किया गया था। पुलिस टीम द्वारा लगातार किये जा रहे प्रयासों से सर्विलांस तथा मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम द्वारा दोनो फरार अभियुक्तों हिमांशु चौधरी पुत्र सतीश तथा गीता पत्नी हिमांशु चौधरी को अमृतसर पंजाब से गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में अभियुक्ता गीता द्वारा बताया गया कि मृतक श्याम लाल से विगत 12 वर्षों से उसके अवैध सम्बन्ध थे, जिसके चलते वह पिछले 03 सालों से अपनी पुत्री के साथ अपने पहले पति से अलग रह रही थी तथा मई 2024 में उसके द्वारा अभियुक्त हिमांशु चौधरी से मन्दिर में शादी की थी। अभियुक्त हिमांशु चौधरी देहरादून से एमबीबीएस की पढाई कर रहा था तथा बार-बार ड्राप आउट होने के कारण उसकी पढाई पर काफी खर्चा हो गया था। पैसों की तंगी को पूरा करने के लिये दोनो दम्पत्ति अभियुक्तों ने मृतक श्यामलाल की अभियुक्ता गीता के साथ अश्लील विडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल कर उससे पैसा ऐंठने की योजना बनाई। योजना के मुताबिक अभियुक्तों द्वारा किशननगर एक्स्टेंशन में अपने किराये के कमरे से थोडी दूरी पर एक अन्य कमरा किराये पर लिया तथा दो फरवरी को अभियुक्ता गीता द्वारा मृतक श्याम लाल को फोन कर किराये पर लिये गये दूसर कमरे पर बुलाया गया, जहां अभियुक्त हिमांशु चौधरी पहले से ही मौजूद था, जो छिपकर दोनो की अश्लील वीडियो बनाने की फिराक में था। कमरे में पहुंचने के बाद मृतक श्यमालाल को दोनो अभियुक्तों की योजना की भनक लगने पर वो जोर-जोर से हल्ला करने लगा। इस दौरान अभियुक्तों द्वारा उसे बांधकर उस पर काबू करने का प्रयास किया गया परन्तु मृतक श्यामलाल के लगातार जोर-जोर से चिल्लाने पर दोनो अभियुक्तों ने उसका मूंह बन्द कर दिया तथा गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। हत्या के पश्चात अभियुक्तों द्वारा मृतक के शव को उक्त कमरे में ही छोड दिया तथा घटना के अगले दिन अभियुक्ता गीता द्वारा उक्त घटना की जानकारी देते हुए अपने भाई अजय को तथा 04 फरवरी को अपने बहनोई धनराज चावला को देते हुए उन्हें देवबंद सहारनपुर से देहरादून बुलाया। चूकिं अभियुक्त हिमांशु एमबीबीएस की पढाई कर रहा था, तो उसे जानकारी थी कि शव को एक दो दिन रखने के बाद शरीर में खून जम जाता है तथा उसे काटने पर शरीर से खून नहीं निकलता है, जिस पर अभियुक्त हिमांशु चौधरी द्वारा अन्य अभियुक्तों के साथ मिलकर मृतक श्यामलाल के शव के अलग-अलग टुकडे कर उन्हें रस्सी से बांधकर प्लास्टिक के अलग-अलग कट्टों में डाल दिया तथा अभियुक्त धनराज चावला द्वारा लाये गये वाहन में घरेलू सामान के साथ रखकर देहरादून से देवबंद ले गये तथा शव को देवबंद में साखन की नहर में फेंक दिया। घटना के बाद पुलिस को गुमराह करने के लिये अभियुक्तों द्वारा मृतक की मोटर साइकिल को आईएसबीटी के पास सडक किनारे एक खाली प्लाट में खडा कर दिया तथा वाहन की नम्बर प्लेट को उखाडकर कबाड में फेंक दिया। घटना के बाद अभियुक्त हिमाशु चौधरी देवबंद से रूडकी आ गया। जहां से वह गीता के साथ पुलिस से बचने के लिये पहले मुम्बई फिर जयपुर, प्रयागराज, कुरूक्षेत्र तथा अमृतसर में अलग-अलग स्थानों में छिपकर रह रहा था।
पुलिस टीम निरीक्षक प्रदीप सिंह राणा, प्रभारी थाना पटेलनगर,निरीक्षक योगेश दत्त थाना पटेलनगर, उपनिरीक्षक देवेश खुगशाल, चौकी प्रभारी आईएसबीटी, उपनिरीक्षक दीनदयाल, विजय प्रताप कांस्टेबल अरशद, विकास कुमार, हेमन्ती नन्दन तथा एसओजी टीम, निरीक्षक विनोद गुसांई, प्रभारी एसओजी नगर, उपनिरीक्षक विनोद राणा, कुन्दन राम,हैड कांस्टेबल किरण कुमार
, कांस्टेबल ललित कुमार, पंकज कुमार, नरेन्द्र, लोकेन्द्र, अमित, आशिष शर्मा, विपिन, महिला कांस्टेबल मोनिका शामिल थे ।








