
वन्यजीव सप्ताह-2026 का शुभारंभ, मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने पर जोर
देहरादून 1 अक्टूबर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को एफआरआई परिसर में आयोजित कार्यक्रम में वन्यजीव सप्ताह-2026 का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने वन्यजीव संघर्ष के दौरान अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की जान बचाने वाले 18 लोगों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने सभी सम्मानित लोगों को 51-51 हजार रुपये की धनराशि देने की घोषणा भी की।
मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागीय स्टॉलों और वन्यजीव फोटोग्राफी पर आधारित फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने वन्यजीव विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को भी सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रत्येक जिले में कम से कम एक नए पर्यटन स्थल की पहचान करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक सुंदरता को सुरक्षित रखते हुए इन स्थानों पर पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएं। उन्होंने कहा कि हल्द्वानी में चिड़ियाघर की परिकल्पना को सरकार ने अपने घोषणा पत्र में शामिल किया है। इस दिशा में तेजी से काम किया जाएगा, जिससे यह वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण शिक्षा और पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सके।
जंगल और वन्यजीवों के रास्ते सुरक्षित रखना प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्यजीव हमारी आस्था, संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा हैं। सनातन संस्कृति ने हमेशा मानव और जीव-जगत के बीच सह-अस्तित्व का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि वन्यजीवों के जंगल सुरक्षित रहें और उनके आवागमन के रास्ते खुले रहें। विकास परियोजनाओं के साथ वन्यजीवों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जा रही है। दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारा इसका उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि हिमालय, घने जंगल, नदियों, झीलों और समृद्ध जैव विविधता से संपन्न उत्तराखंड की सबसे बड़ी पूंजी उसकी प्रकृति है। कॉर्बेट और राजाजी जैसे राष्ट्रीय उद्यान राज्य की पहचान हैं, जहां वर्षभर बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। सरकार प्रकृति के साथ संतुलन बनाते हुए वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा दे रही है, ताकि जंगल सुरक्षित रहने के साथ स्थानीय लोगों की आय भी बढ़े।
मुख्यमंत्री ने बताया कि कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों के पुनर्स्थापन की परियोजना का दूसरा चरण शुरू होने जा रहा है। उन्होंने उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हिम तेंदुआ पर्यटन की संभावनाओं को देखते हुए वन विभाग को इस दिशा में तेजी से काम करने के निर्देश दिए। इससे हिम तेंदुए के संरक्षण के साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकेंगे।
मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना है, ताकि वन्यजीव भी सुरक्षित रहें और आम लोगों को भी परेशानी न हो। जंगलों की निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। कॉर्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व में विशेष बाघ संरक्षण बल के गठन की दिशा में भी निर्णय लिया गया है।
उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण में स्थानीय लोगों की भागीदारी जरूरी है। सरकार इको-टूरिज्म को बढ़ावा दे रही है, ताकि जंगलों के आसपास रहने वाले लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिले और वे प्रकृति संरक्षण में भागीदार बनें। एक लाख युवाओं को ‘मुख्यमंत्री युवा इको-उद्यमी’ बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इसके तहत नेचर गाइड, ड्रोन पायलट, वन्यजीव फोटोग्राफर और इको-टूरिज्म से जुड़े कौशल को रोजगार एवं उद्यम से जोड़ा जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रत्येक जिले में इको क्लब के माध्यम से विद्यार्थियों के लिए वन्यजीवों से जुड़ी शैक्षिक यात्राएं शुरू की गई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था में संतुलन बनाकर विकास को आगे बढ़ा रही है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक धरोहर सुरक्षित रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मिशन लाइफ’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। राज्य में सकल पर्यावरण उत्पाद के माध्यम से जल, जंगल और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के मूल्यांकन का कार्य भी किया जा रहा है।
वन्यजीव हमले में मृत्यु पर 10 लाख रुपये मुआवजा
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण के साथ प्रभावित नागरिकों की मदद करना भी सरकार की प्राथमिकता है। वन्यजीव हमले में मृत्यु होने पर दी जाने वाली अनुग्रह राशि को छह लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये किया गया है। हमले में घायल होने वाले नागरिकों के उपचार का खर्च भी राज्य सरकार वहन कर रही है।
उन्होंने पर्यटकों से अपील की कि जंगल सफारी, राष्ट्रीय उद्यान या धार्मिक स्थलों की यात्रा के दौरान गंदगी न फैलाएं, प्लास्टिक न छोड़ें और वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि के साथ वनभूमि भी है। राज्य में 71 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र वनाच्छादित है और लोगों की आजीविका में भी वनों एवं वन्यजीवों का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। इस वर्ष वन्यजीव सप्ताह की थीम ‘जुड़े आवास—वन्य जीवन का विकास’ रखी गई है। मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए विभिन्न वन्यजीव गलियारों के निर्माण पर भी काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा और उनकी स्वतंत्रता भी आम नागरिकों की सुरक्षा जितनी ही महत्वपूर्ण है। वनों को लोगों की आजीविका से जोड़ने और शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि वन्यजीव सप्ताह जैसे आयोजन विशेषकर युवाओं में वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करेंगे।
कार्यक्रम में विधायक सविता कपूर, राजीव तलवार, मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. गोविंद बिष्ट, प्रमुख सचिव वन आरके सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) कपिल लाल, प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक नीना गैरवाल सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।










