
देहरादून, 17 अगस्त 2026। जल जीवन मिशन के तहत पूर्ण एवं प्रगतिरत योजनाओं के सापेक्ष करीब ढाई वर्षों से लंबित भुगतान को लेकर देवभूमि जल शक्ति कांट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर ठेकेदारों के लंबित वैध देयकों का भुगतान सुनिश्चित कराने की मांग की है। भुगतान नहीं होने पर ठेकेदारों ने राज्यव्यापी आंदोलन की तैयारी की चेतावनी दी है।
सहारनपुर रोड स्थित एक होटल में आयोजित प्रेस वार्ता में एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित अग्रवाल ने कहा कि ‘हर घर नल से जल’ प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी जनकल्याणकारी योजना है। राज्य में योजना के तहत 92.46 प्रतिशत कार्य पूर्ण होने का दावा किया गया है। कुल 16,555 योजनाओं में से 15,540 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि 14.48 लाख परिवारों में से 14.20 लाख परिवारों को पेयजल कनेक्शन उपलब्ध कराया जा चुका है।
अमित अग्रवाल ने कहा कि योजनाओं को धरातल पर उतारने में ठेकेदारों ने अपने संसाधनों, बैंक ऋण और बाजार से उधार लेकर सामग्री, श्रमिक, मशीनरी और परिवहन आदि का खर्च उठाया। इसके बावजूद उनके वैध देयकों का भुगतान करीब ढाई वर्षों से लंबित है। इससे ठेकेदारों की कार्यशील पूंजी, बैंक ऋण, ब्याज और अन्य वित्तीय दायित्व लगातार बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार और विभाग ठेकेदारों से निर्धारित समय में काम पूरा करने की अपेक्षा करते हैं और देरी पर नोटिस, पेनल्टी, अनुबंध निरस्तीकरण, प्रतिभूति जब्ती और ब्लैकलिस्टिंग जैसी कार्रवाई की चेतावनी दी जाती है। ऐसे में पूर्ण किए गए कार्यों का भुगतान वर्षों तक लंबित रखना भी उचित नहीं है।
अग्रवाल ने कहा कि कई योजनाओं में देरी ठेकेदारों के नियंत्रण से बाहर के कारणों, जैसे वन विभाग की अनुमति, रेलवे अनुमति, भूमि संबंधी मामलों, विभागीय स्वीकृति और अन्य तकनीकी एवं प्रशासनिक कारणों से होती है। ऐसे मामलों में बिना वस्तुनिष्ठ जांच के ठेकेदारों को जिम्मेदार ठहराकर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से मांग की कि पूर्ण एवं सत्यापित कार्यों के लंबित भुगतान का जनपदवार और प्रभागवार विवरण तैयार कर तत्काल भुगतान कराया जाए। रनिंग बिल और अंतरिम देयकों का भी समयबद्ध निस्तारण किया जाए। करीब ढाई वर्षों से लंबित भुगतान के लिए शासन स्तर पर विशेष समीक्षा बैठक कर प्रत्येक मामले की समयसीमा तय करने और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की गई।
ठेकेदारों ने यह भी मांग की कि भुगतान में देरी के कारण प्रभावित कार्यों पर अनावश्यक दंडात्मक कार्रवाई से पहले वस्तुनिष्ठ समीक्षा की जाए। ठेकेदारों के नियंत्रण से बाहर के कारणों से विलंबित योजनाओं में आवश्यकतानुसार अनुबंध के अनुसार समय-विस्तार दिया जाए।अग्रवाल ने कहा कि केंद्र से धनराशि मिलने की प्रतीक्षा में ठेकेदारों के वैध भुगतान को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जाना चाहिए। जरूरत पड़ने पर राज्य स्तर पर अंतरिम वित्तीय व्यवस्था कर भुगतान किया जाए, ताकि जल जीवन मिशन के कार्य प्रभावित न हों।उन्होंने कहा, “ठेकेदार सरकार से किसी प्रकार की अनुकंपा या अतिरिक्त आर्थिक लाभ नहीं मांग रहे हैं। हम केवल उस कार्य की वैधानिक और अनुबंधित धनराशि मांग रहे हैं, जिसे हमने शासन और विभाग के निर्देश पर अपने संसाधनों से पूरा किया है।”अमित अग्रवाल ने कहा कि कई राज्यों में भुगतान को लेकर ठेकेदार सड़क पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि उत्तराखंड में ठेकेदारों ने अभी तक संयम बनाए रखा है और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग सरकार तक पहुंचा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन की ओर से मुख्यमंत्री से कई बार मिलने का अनुरोध किया गया, लेकिन अब तक मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं हो पाई और समस्या का समाधान भी नहीं हुआ।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते लंबित भुगतानों का समाधान नहीं किया गया तो ठेकेदारों की कार्यशील पूंजी पर गंभीर असर पड़ेगा और इसका सीधा प्रभाव जल जीवन मिशन की योजनाओं की प्रगति पर पड़ सकता है। एसोसिएशन ने संकेत दिया कि मांग पूरी नहीं होने पर राज्यव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
प्रेस वार्ता में जितेंद्र मलिक, गौरव गोयल, रजत सिंघल, आशुतोष सक्सैना, ध्रुव जोशी, जगजीत, मनोज भारद्वाज, सुनील गुप्ता, सचिन मित्तल, अमित अग्रवाल, सुनील प्रकाश मित्तल, अंकित सलार, शुभम तोमर, संदीप मित्तल सहित अन्य ठेकेदार मौजूद रहे।








