
देहरादून 29 जुलाई। उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक हस्तशिल्प और महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में बुधवार को राजधानी देहरादून में ‘थाती बाई हँसुली के पहले ऑफलाइन आउटलेट का शुभारंभ किया गया। इस पहल के माध्यम से पारंपरिक पहाड़ी चांदी के आभूषणों के साथ स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय कारीगरों के उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
संस्थापक गायत्री बालोदी ने बताया कि दो वर्ष पहले हँसुली शुरुआत उत्तराखंड की पारंपरिक पहाड़ी चांदी की ज्वेलरी को आधुनिक स्वरूप देकर देशभर तक पहुंचाने के उद्देश्य से की गई थी। लोगों के सकारात्मक सहयोग और विश्वास के बाद अब पहला ऑफलाइन आउटलेट शुरू किया गया है।
उन्होंने कहा कि ‘थाती बाई हँसुली केवल एक व्यावसायिक प्रतिष्ठान नहीं, बल्कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं, स्थानीय कारीगरों और छोटे उद्यमियों के लिए एक साझा मंच है। यहां उनके उत्पादों को ऑफलाइन के साथ-साथ ऑनलाइन माध्यम से भी बाजार उपलब्ध कराया जाएगा।
गायत्री बालोदी ने बताया कि राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं और सहयोग से देश के कई राज्यों में स्टॉल लगाने का अवसर मिला, जिससे बाजार की मांग, ग्राहकों की पसंद, पैकेजिंग, पंजीकरण और विपणन को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली। बिना ब्याज के ऋण जैसी सुविधाओं ने भी कारोबार के विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उन्होंने कहा कि आज उत्तराखंड की महिलाएं ज्वेलरी निर्माण, डिजाइनिंग, मार्केटिंग और ब्रांडिंग जैसे क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। उनका लक्ष्य प्रदेश की पारंपरिक कला, संस्कृति और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।
इस पहल को प्रदेश में महिला सशक्तिकरण, स्थानीय हस्तशिल्प के संरक्षण तथा रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।इस अवसर पर विधायक उमेश शर्मा काऊ, महापौर सौरभ थपलियाल, लोकगायक रविन्द्र मंद्रवाल, सौरभ मैथानी, प्रीतम भरतवाण, के.सी. चमोली, चित्रांशी रावत, पूजा तोमर, सुनीता रजवाड़, गायत्री बालोदी सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।







