
नई दिल्ली/सोमनाथ 07 मई ।प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण और उसके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्व को लेकर भावुक और प्रेरणादायी संदेश साझा किया है। उन्होंने कहा कि 11 मई को वह एक बार फिर सोमनाथ पहुंचेंगे, जहां पुनर्स्थापित सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 की शुरुआत में वह “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” में शामिल हुए थे, जो सोमनाथ मंदिर पर पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया गया था। उन्होंने कहा कि कुछ ही महीनों के भीतर सोमनाथ से जुड़े दो ऐतिहासिक अवसरों का साक्षी बनना उनके लिए सौभाग्य की बात है।
प्रधानमंत्री ने सोमनाथ को भारतीय सभ्यता की अटूट चेतना का प्रतीक बताते हुए कहा कि समुद्र की लहरें यह संदेश देती हैं कि कितने भी संकट और आक्रमण आएं, भारत की आत्मा फिर उठ खड़ी होती है। उन्होंने कहा कि “विध्वंस से सृजन” की यह यात्रा भारत की सांस्कृतिक शक्ति और आत्मविश्वास का प्रतीक है।
उन्होंने सोमनाथ के इतिहास में योगदान देने वाले अनेक महान व्यक्तित्वों को याद किया, जिनमें लकुलीश, सोम शर्मा, राजा भोज, सिद्धराज जयसिंह, कुमारपाल सोलंकी, अहिल्याबाई होल्कर, गायकवाड़ शासक, वीर हमीरजी गोहिल और वीर वेगड़ाजी भील जैसे नाम शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन महान विभूतियों ने सोमनाथ की आस्था, संस्कृति और गौरव की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रधानमंत्री मोदी ने सरदार वल्लभभाई पटेल को विशेष रूप से याद करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद सोमनाथ मंदिर की जर्जर स्थिति उन्हें अत्यंत व्यथित करती थी। उन्होंने 13 नवंबर 1947 को सोमनाथ के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरदार पटेल का यह सपना केएम मुंशी और जाम साहब जैसे राष्ट्रपुरुषों ने आगे बढ़ाया।उन्होंने बताया कि 11 मई 1951 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर का उद्घाटन किया था। उस समय कई विरोधों के बावजूद डॉ. प्रसाद का समारोह में शामिल होना इस ऐतिहासिक अवसर को और भी विशेष बना गया।
प्रधानमंत्री ने वर्ष 2001 की स्मृतियों को भी साझा किया, जब गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने सोमनाथ मंदिर के पुनः उद्घाटन के 50 वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। उस कार्यक्रम में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी भी उपस्थित थे।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनकी सरकार “विकास भी, विरासत भी” के मंत्र पर चलते हुए सोमनाथ से काशी, अयोध्या, केदारनाथ, उज्जैन और कामाख्या जैसे आध्यात्मिक स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ते हुए उनकी मूल सांस्कृतिक पहचान को भी सुरक्षित रख रही है। उन्होंने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी और सुविधाओं से स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होती है तथा “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को बल मिलता है।प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि सोमनाथ की हजार वर्षों की संघर्षगाथा और वीर बलिदानों की स्मृति में अगले एक हजार दिनों तक विशेष पूजाओं का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि देशभर से लोग इन पूजाओं के लिए योगदान भी दे रहे हैं।
उन्होंने देशवासियों से इस विशेष अवसर पर सोमनाथ आने का आग्रह करते हुए कहा कि सोमनाथ के तट पर खड़े होकर हर भारतीय भारत की अदम्य सांस्कृतिक चेतना और सनातन परंपरा की शक्ति को महसूस कर सकेगा।
अंत में प्रधानमंत्री ने कहा, “सोमनाथ भारत की उस अजेय आत्मा का प्रतीक है, जिसे कोई भी शक्ति कभी पराजित नहीं कर सकी। जय सोमनाथ!”






