
देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में राज्यहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में परिवहन, कुम्भ मेला-2027 की तैयारियों, शिक्षा, वन, खनन और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े फैसलों पर मुहर लगी।
कैबिनेट ने उत्तराखंड मोटर यान (संशोधन) नियमावली 2026 को मंजूरी देते हुए परिवहन विभाग में प्रवर्तन चालकों के लिए पुलिस चालकों की तर्ज पर वर्दी निर्धारित करने का निर्णय लिया। साथ ही विभाग को 250 नई बसें खरीदने की अनुमति दी गई। जीएसटी दरों में कमी का लाभ देते हुए पहले स्वीकृत 100 बसों की संख्या बढ़ाकर 109 करने का भी निर्णय लिया गया।हरिद्वार में प्रस्तावित कुम्भ मेला-2027 की तैयारियों को गति देने के लिए निर्माण कार्यों की स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। अब एक करोड़ रुपये तक के कार्य मेलाधिकारी, पांच करोड़ तक के कार्य गढ़वाल आयुक्त स्तर से स्वीकृत होंगे, जबकि इससे अधिक लागत वाले कार्यों के लिए शासन से अनुमति लेनी होगी।विधिक सेवा क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए जिला सैनिक कल्याण अधिकारी को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में पदेन सदस्य बनाया गया है। साथ ही एसिड अटैक पीड़ितों को निःशुल्क विधिक सहायता के दायरे में शामिल किया गया है।
खनन क्षेत्र में उपखनिज पर रॉयल्टी दर 7 रुपये से बढ़ाकर 8 रुपये प्रति क्विंटल कर दी गई है। वहीं आबकारी नीति के अनुरूप 6 प्रतिशत वैट दर को भी कैबिनेट ने मंजूरी प्रदान की है।
वन विभाग के अंतर्गत वन दरोगा पद के लिए शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट से बढ़ाकर स्नातक कर दी गई है। साथ ही आयु सीमा 21 से 35 वर्ष तय की गई है, जबकि वन आरक्षी के लिए आयु सीमा 18 से 25 वर्ष निर्धारित की गई है।
शिक्षा क्षेत्र में भी कई अहम फैसले लिए गए हैं। अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के लिए नई संबद्धता व्यवस्था लागू की गई है, जिसके तहत कक्षा 1 से 8 तक के मदरसों की संबद्धता जिला स्तर पर और कक्षा 9 से 12 तक के संस्थानों की संबद्धता रामनगर स्थित विद्यालयी शिक्षा परिषद से होगी। इसके साथ ही संस्कृत शिक्षा सेवा नियमावली 2026 को मंजूरी दी गई है, जिससे लंबे समय से लंबित पदोन्नति प्रक्रियाओं को गति मिलेगी। विशेष शिक्षा शिक्षकों की भर्ती के लिए भी नई शैक्षिक योग्यता निर्धारित की गई है।लोक निर्माण विभाग में दिव्यांग श्रेणी के पदों को पुनः सृजित करने, ‘डी’ श्रेणी के ठेकेदारों की निविदा सीमा एक करोड़ से बढ़ाकर डेढ़ करोड़ करने तथा एकल संवर्ग भर्तियों के लिए स्पष्ट एसओपी बनाने का भी निर्णय लिया गया है।
इसके अलावा, उच्च शिक्षा विभाग की मुख्यमंत्री शोध प्रोत्साहन योजना को अब अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों तक विस्तारित किया गया है। वन सीमांत क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए नई नीति को मंजूरी दी गई है, जिससे स्वरोजगार के अवसर बढ़ने के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में मदद मिलेगी।
वर्कचार्ज कर्मचारियों की पेंशन से जुड़े मामले में न्यायालय के आदेशों को भी कैबिनेट के संज्ञान में लिया गया।कुल मिलाकर, कैबिनेट के इन फैसलों से राज्य में विकास कार्यों को रफ्तार मिलने के साथ प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सरलता और रोजगार के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद जताई जा रही है।







