
देहरादून 28 अप्रैल। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मातृशक्ति के सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों पर किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने विधानसभा के विशेष सत्र ‘नारी सम्मान-लोकतंत्र में अधिकार’ को संबोधित करते हुए महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने के उद्देश्य से लाए गए नारी शक्ति वंदन अधिनियम को यथाशीघ्र लागू करने के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों के समर्थन में सदन से सर्वसम्मत संकल्प व्यक्त करने का प्रस्ताव रखा।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत राज्य आंदोलनकारियों और उत्तराखंड की प्रेरणादायी महिलाओं को नमन करते हुए की। उन्होंने गौरा देवी, टिंचरी माई, बिशनी देवी शाह, जशूली शौक्याण, कुंती वर्मा, भागीरथी देवी, मंगला देवी, हंसा धनाई, सरला बहन, बेलमती चौहान, सुशीला बहन और कमला पंत जैसी विभूतियों का स्मरण किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन संस्कृति में नारी को देवी स्वरूप मानकर उसकी आराधना की जाती है। माँ दुर्गा, माँ लक्ष्मी और माँ सरस्वती के रूप में नारी के साहस, समृद्धि और ज्ञान का वंदन किया जाता है। उन्होंने कहा कि रानी लक्ष्मीबाई, सावित्रीबाई फुले और अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला जैसी महिलाओं ने देश को नई दिशा दी है। आज नारी शक्ति केवल सहभागिता तक सीमित नहीं, बल्कि नेतृत्व की भूमिका निभा रही है।
उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 मिशन की सफलता, महिला क्रिकेट टीम की उपलब्धियां, राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से पास आउट होना और सेना-वायु सेना में अग्रिम मोर्चों पर सेवाएं देना नारी शक्ति के बढ़ते सामर्थ्य के उदाहरण हैं। उत्तराखंड की तीलू रौतेली, रानी जिया रानी और चिपको आंदोलन की अग्रदूत गौरा देवी का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की धरती सदैव नारी शक्ति की प्रेरणा रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम लेकर आए, जिसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया। उन्होंने कहा कि यह केवल संख्या बढ़ाने का प्रयास नहीं, बल्कि नीति निर्माण में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में युगांतकारी कदम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने इस संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए सभी राजनीतिक दलों से सहयोग मांगा था और अगले लोकसभा चुनावों तक महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के उद्देश्य से 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया।
मुख्यमंत्री धामी ने विपक्ष पर महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया था कि परिसीमन के माध्यम से किसी भी राज्य की सीटों के साथ भेदभाव नहीं होगा और इसी कारण सीटें बढ़ाने का प्रावधान रखा गया।
उन्होंने कहा कि विपक्ष दशकों तक सत्ता में रहा, लेकिन महिलाओं को उनका वास्तविक अधिकार देने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। जब पहली बार महिलाओं के हित में गंभीर प्रयास हुए तो उन्हें भी रोकने का प्रयास किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की मातृशक्ति अब समझ चुकी है कि कौन उनके अधिकारों के लिए ईमानदारी से प्रयास कर रहा है।





