वन्यजीवों का सुरक्षा कवच बनेगा वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर

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दिल्ली-दून एक्सप्रेस-वे पर 12 किमी लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर, पर्यावरण संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण

देहरादून 13 अप्रैल ।दिल्ली-दून एक्सप्रेस-वे पर निर्मित एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर वन्यजीवों के लिए सुरक्षा कवच साबित होगा। इसके निर्माण से मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी आने की प्रबल संभावना जताई गई है। लगभग 12 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर एशिया का सबसे लंबा एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर है, जिसे विकास और पर्यावरण संरक्षण के संतुलन का बेहतरीन उदाहरण माना जा रहा है।
सोमवार को वन मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में वन मंत्री सुबोध उनियाल ने इस परियोजना से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एक्सप्रेस-वे का अंतिम 20 किलोमीटर भाग उत्तर प्रदेश के शिवालिक वन प्रभाग और उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व व देहरादून वन प्रभाग के घने वन क्षेत्रों से होकर गुजरता है।
वन मंत्री ने बताया कि परियोजना के अंतर्गत उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में वन भूमि हस्तांतरण के सापेक्ष 165.5 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रतिपूरक वृक्षारोपण किया गया है, जिसमें लगभग 1.95 लाख पौधे लगाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट मॉनिटरिंग कमेटी के निर्देशन में 40 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि से इको-रेस्टोरेशन के विभिन्न कार्य भी किए जा रहे हैं।उन्होंने कहा कि कॉरिडोर में हाथियों के लिए विशेष अंडरपास सहित अन्य वन्यजीव मार्ग बनाए गए हैं, जिससे उनकी निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित हो सके। साथ ही साउंड बैरियर और लाइट बैरियर जैसी व्यवस्थाएं कर वन्यजीवों पर शोर एवं प्रकाश प्रदूषण का प्रभाव न्यूनतम रखने का प्रयास किया गया है।
वन मंत्री ने बताया कि इस परियोजना से अगले 20 वर्षों में लगभग 240 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है, जो 60 से 68 लाख पेड़ों द्वारा अवशोषित कार्बन के बराबर है। साथ ही लगभग 19 प्रतिशत ईंधन की बचत भी होगी।उन्होंने कहा कि यह कॉरिडोर वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन को बढ़ावा देने के साथ-साथ जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे पर्यटन, व्यापार और स्थानीय रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
तकनीक ने बचाए 33,840 पेड़
परियोजना के दौरान प्रारंभिक आकलन में 45 हजार पेड़ों की कटाई का अनुमान था, लेकिन आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के चलते 33,840 पेड़ों को बचा लिया गया। अब केवल 11,160 पेड़ों की कटाई करनी पड़ी, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
प्रेस वार्ता में वन विभाग के पीसीसीएफ (हॉफ) आर. के. मिश्रा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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