देहरादून 27 फरवरी
। डीएवी (पीजी) कॉलेज की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई की वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी डॉ. ज्योति सेंगर ने कहा कि एनएसएस छात्र-छात्राओं के लिए समाज सेवा का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी शिक्षा के साथ अपने भविष्य का निर्माण करते हुए “राष्ट्र प्रथम” की भावना को आत्मसात कर समाज सेवा के माध्यम से एक श्रेष्ठ नागरिक की भूमिका निभाते हैं।
। डीएवी (पीजी) कॉलेज की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई की वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी डॉ. ज्योति सेंगर ने कहा कि एनएसएस छात्र-छात्राओं के लिए समाज सेवा का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी शिक्षा के साथ अपने भविष्य का निर्माण करते हुए “राष्ट्र प्रथम” की भावना को आत्मसात कर समाज सेवा के माध्यम से एक श्रेष्ठ नागरिक की भूमिका निभाते हैं।डॉ. सेंगर बाल भवन, रायपुर में आयोजित एनएसएस की “बी” एवं “सी” इकाई के सात दिवसीय विशेष वार्षिक शिविर में छात्राओं को संबोधित कर रही थीं। शिविर में इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी की युवा रेडक्रॉस समिति द्वारा आपदा प्रबंधन, अग्नि शमन तथा प्राथमिक उपचार संबंधी प्रशिक्षण एवं जागरूकता अभियान आयोजित किया गया।
युवा रेडक्रॉस समिति के मुख्य प्रशिक्षक एवं आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ डॉ. अनिल वर्मा ने कहा कि रेडक्रॉस मानवता की सेवा में संलग्न विश्व का सबसे बड़ा संगठन है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 की उत्तरकाशी प्राकृतिक आपदा तथा 2013 की केदारनाथ जलप्रलय त्रासदी के दौरान उन्होंने रेडक्रॉस के माध्यम से राहत कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह प्रशिक्षण छात्राओं के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।
एनएसएस इकाई “सी” की कार्यक्रम अधिकारी डॉ. रेणुका रावत ने बताया कि प्रशिक्षण के अंतर्गत अग्नि शमन के विषय में आग के प्रकार तथा आग बुझाने के सिद्धांतों की जानकारी दी गई। प्राथमिक उपचार सत्र में शरीर के जलने एवं झुलसने की स्थिति, प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय श्रेणी के दाग, शरीर के जले हुए भाग का प्रतिशत ज्ञात करने की ‘नौ के नियम’ पद्धति तथा उपचार के उपाय समझाए गए।
इसके अतिरिक्त एनीमिया (रक्ताल्पता), हीमोग्लोबिन की कमी से होने वाली बीमारियों, महिलाओं एवं बच्चों में होने वाले रोगों तथा हीमोग्लोबिन बढ़ाने के उपायों की जानकारी दी गई। गंभीर आनुवंशिक रक्त रोग थैलीसीमिया की पहचान, बचाव और उपचार के विषय में भी विस्तार से प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
आपदा की आपातकालीन परिस्थितियों जैसे भूकंप एवं बाढ़ के दौरान क्षतिग्रस्त भवनों से घायलों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए ‘दमकल कर्मी उठान विधि’, ‘आगे-पीछे उठान विधि’ तथा रस्सी बचाव पद्धति के अंतर्गत ‘कुर्सी गांठ’ तकनीक का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया।
कार्यक्रम अधिकारी डॉ. रेणुका रावत के संयोजन में दलनायिकाओं खुशी कुमारी सिंह, आस्था सेमवाल, सलोनी, तमन्ना रावत, आकांक्षा, कनिका, कृतिका डबराल, स्वाति, सृष्टि, तृप्ति, अंजलि भट्ट, रिया, प्रिया, वैष्णवी छेत्री, भूमिका, अंशिका गुप्ता, शानवी शर्मा एवं तनूजा सहित अन्य छात्राओं ने बचाव विधियों का प्रभावी प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी डॉ. ज्योति सेंगर ने कुशल प्रशिक्षण प्रदान करने एवं रक्तदान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. अनिल वर्मा को पौधा भेंटकर सम्मानित किया। डॉ. वर्मा ने शिविर के अनुशासित एवं सफल आयोजन के लिए डॉ. ज्योति सेंगर एवं डॉ. रेणुका रावत का आभार व्यक्त किया।
Author: Day Night Khabar
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