
हरिद्वार, 21 फरवरी 2026। पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले कुंभ मेला के दिव्य एवं भव्य आयोजन को सुनिश्चित करने के लिए ₹234.55 करोड़ की लागत से 34 महत्वपूर्ण अवसंरचना कार्यों का शिलान्यास किया। हरिद्वार स्थित कुंभ मेला नियंत्रण भवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि ये परियोजनाएं न केवल कुंभ मेला-2027 के सफल, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित आयोजन में सहायक होंगी, बल्कि शहर के दीर्घकालीन विकास को भी नई दिशा देंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की प्रतिबद्धता है कि कुंभ मेला-2027 को वैश्विक स्तर पर भव्य, सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाया जाए। इसके लिए स्थायी प्रकृति के विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि मेला समाप्त होने के बाद भी हरिद्वार की आधारभूत संरचना सुदृढ़ बनी रहे।
घाट एवं सिंचाई अवसंरचना पर ₹70.54 करोड़
सिंचाई विभाग के अंतर्गत कुल 7 कार्यों पर ₹70.54 करोड़ व्यय किए जाएंगे। इसके तहत अपर गंगा नहर के दोनों तटों पर विभिन्न स्थानों पर घाटों का निर्माण एवं पुनर्विकास किया जाएगा। साथ ही 90 मीटर स्पान का कम्पोजिट स्टील गर्डर द्वि-लेन सेतु बनाया जाएगा तथा तीन अस्थायी पुलों की स्थापना, मरम्मत एवं रखरखाव किया जाएगा।
सड़क एवं परिवहन अवसंरचना पर ₹127.23 करोड़
लोक निर्माण विभाग द्वारा 12 कार्यों पर ₹127.23 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इसमें बहादराबाद–सिडकुल मार्ग का चार लेन चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण, राष्ट्रीय राजमार्ग-334 (दिल्ली–हरिद्वार–देहरादून) का चौड़ीकरण, नगर क्षेत्र में बिटुमिनस कंक्रीट से सड़कों का नवीनीकरण, फुटपाथ निर्माण, सौंदर्यीकरण तथा प्रशासनिक रोड कॉरिडोर का विकास शामिल है।
पेयजल योजनाओं पर ₹18.11 करोड़
जल संस्थान के अंतर्गत 9 कार्यों पर ₹18.11 करोड़ व्यय होंगे। इसमें पंपिंग जलापूर्ति योजनाओं का पुनर्गठन, 1500 केएल क्षमता का ओवरहेड टैंक व ट्यूबवेल निर्माण तथा 10 मीटर व्यास के 5 आरसीसी इन्फिल्ट्रेशन कुओं का निर्माण किया जाएगा।
श्रद्धालु सुविधाओं पर ₹18.67 करोड़
तीर्थयात्रियों की सुविधाओं के लिए 6 कार्यों पर ₹18.67 करोड़ खर्च होंगे। इसके अंतर्गत चंडी देवी एवं मनसा देवी मंदिर मार्ग पर सुविधाओं का विकास, बैरक एवं औषधि भंडारण कक्ष का निर्माण तथा मेला नियंत्रण भवन का नवीनीकरण और अतिरिक्त बैरकों का निर्माण किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुंभ मेला आस्था के साथ-साथ उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और आर्थिक सशक्तिकरण का भी प्रतीक है। राज्य सरकार सभी विभागों के समन्वय से समयबद्ध तरीके से कार्यों को पूर्ण कराने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित, स्वच्छ और सुव्यवस्थित वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।







